
MP Diwali Advisory: दीपावली पर आतिशबाजी से होने वाली बर्न इंजरी के मामलों को देखते हुए मध्यप्रदेश में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने कलेक्टरों को बचाव के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। जारी कि गए आदेश में कहा गया है कि अस्पतालों में पटाखों से झुलसने वाले मरीजों के इलाज की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है। विभाग ने अवैध रूप से बनाई जाने वाली कार्बाइड गन के इस्तेमाल से होने वाली चोटों पर भी चिंता जताई है। इसके साथ ही बर्न इंजरी से बचाव के लिए आमजन को जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं। अस्पतालों में ऐसे मरीजों के प्राथमिक प्रबंधन और उपचार पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है।
-समस्त चिकित्सालयों में 24x7 चिकित्सकों, नर्सिंग ऑफिसर तथा पैरामेडिकल स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित की जाये तथा चिकित्सालयों में आ रहे रोगियों को यथासंभव उपचार प्रदान किया जाये।
-दीपावली पर्व के दौरान पटाखों एवं आतिशबाजी के उपयोग से जलने (बर्न इंजरी), आंखों में चोट, हाथ-पैर में चोट, कानों को नुकसान तथा धुएं के कारण श्वसन संबंधी समस्याओं के मामले सामने आ सकते हैं। विशेष रूप से बच्चों द्वारा पटाखों के अनुचित एवं असुरक्षित उपयोग से गंभीर दुर्घटनाओं की संभावना रहती है।
-यह सुनिश्चित किया जाये कि चिकित्सालय में बर्न इंजरी के प्रबंधन तथा आतिशबाजी के कारण आई अन्य चोटों के उपचार हेतु आवश्यक औषधि, सामग्री तथा जांच उपकरण उपलब्ध हो।
-कार्बाइड गन के उपयोग से होने वाले विस्फोट में छोटे-छोटे प्लास्टिक और धातु के कण बाहर निकलकर आंख, चेहरा और त्वचा को गंभीर रूप से घायल कर देते हैं। एसीटिलीन गैस के जलने से त्वचा पर झुलसने या आग लगने की संभावना रहती है। एसिटिलीन गैस आंखों एवं त्वचा के लिए बेहद हानिकारक होती है।
-कार्बाइड गन के उपयोग से किशोरों और बच्चों में आंखों की गंभीर चोट जैसे पलक में सूजन, कंजक्टिवा में जलन, कॉर्निया की क्षति, रासायनिक जलन, और कई मामलों में स्थायी रूप से दृष्टि हानि होना भी संभावित है।
-किसी भी पटाखा जनित चोट की स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता लें। प्रदान किये जाने वाला प्राथमिक उपचार एवं सहायता चोट के प्रकार एवं गंभीरता पर निर्भर करती है जिसमें चोट जलन , आंख की चोट या कट हो सकती है।
-कार्बाइड विस्फोट से हुई आंख की चोटों में कॉर्नियल बर्न, आँख में बाहरी वस्तु, फटना या केमिकल बर्न हो सकता है। ऐसी स्थिति में विशेषज्ञ द्वारा जांच (जैसे स्लिट लैम्प एग्जामिनेशन, एक्स-रे/सीटी स्कैन) आवश्यक होती है। स्थिति अनुसार रोगियों को रेफर करना सुनिश्चित करें।
-गंभीर प्रकरणों को उच्च उपचार हेतु बड़े चिकित्सालयों में रेफर किये जाने का प्रबंधन सुनिश्चित किया जाये। रेफर किये जाने वाले रोगियों को प्राथमिक उपचार करते हुये उन्हें स्थिर किया जाये तथा किये गये प्राथमिक उपचार तथा आवश्यक जांच एवं उच्च उपचार का विवरण रेफर विवरण को अंकित किया जाये। रेफर किये जाने वाले चिकित्सालयों में भी समयपूर्व आवश्यक सूचना प्रदान की जाए।
-चिकित्सालयों में आकस्मिक ड्यूटी में कार्यरत चिकित्सक, एम्बुलेंस वाहन चालक तथा पैरामेडिकल स्टाफ का नाम एवं मोबाइल नम्बर प्रदर्शित हो, जिससे आकस्मिक परिस्थितियों में तत्काल संपर्क कर गंभीर रोगियों का रेफर प्रबंधन किया जा सके। एम्बुलेंस में रेफ़र हेतु आवश्यक संसाधन जैसे ऑक्सीजन तथा आवश्यक उपकरणों को क्रियाशील रखा जाए, विशेषकर इनकी जांच कर इनमें उपकरणों की जांच तिथि तथा ऑक्सीजन रिफलिंग की अंतिम तिथि उल्लेखित हो, जिससे अग्रिम उपचार हेतु सुरक्षित रेफ़र किया जा सके ।
-गंभीर रोगियों के परिवहन हेतु 108 एम्बुलेंस वाहन का उपयोग किया जाये। आकस्मिक परिस्थितियों में आवश्यकतानुसार जिला कलेक्टर के अनुमोदन उपरांत गंभीर रोगियों को उपचार हेतु एक जिले से अन्य जिले में अथवा अन्य राज्य में भी परिवहन किया जाये।
-अति गंभीर रोगियों के उपचार हेतु परिवहन के लिए नियमानुसार एयर एम्बुलेंस का उपयोग किया जाये।
-चिकित्सालयों में आने वाले रोगियों में से सामान्य रोगियों को प्रारंभिक उपचार देते हुये डिस्चार्ज किया जाये तथा गंभीर रोगियों को लाईन ऑफ ट्रीटमेंट अनुसार कार्ययोजना तैयार की जाये। गंभीर नेत्र क्षति वाले रोगियों को प्राथमिक उपचार करने उपरांत तत्काल नजदीकी शासकीय महाविद्यालय में रेफर किया जाये।
-रेफर किये गये रोगियों की सूचना संबंधित चिकित्सा महाविद्यालय को प्रदान करें तथा निरंतर रूप से रोगी के उपचार का फॉलोअप लिया जाना सुनिश्चित किया जाये।
-माननीय मुख्यमंत्री जी के निर्देशानुसार समस्त जिला चिकित्सालय/चिकित्सा महाविद्यालयों में संचालित बर्न वार्ड का निरीक्षण किया जाये तथा बर्न वार्ड को उपचार हेतु क्रियाशील रखा जाये।
-निजी चिकित्सालयों/शासकीय संस्थानों/चिकित्सा महाविद्यालयों में प्रतिदिन भर्ती रोगियों की स्थिति की समीक्षा की जाये।
पानी से धोएं: आंख में गंदगी या रासायनिक पदार्थ जाने पर तुरंत साफ, हल्के गुनगुने पानी से 15 मिनट तक आंख को धीरे-धीरे धोए।
आंख न मलें: आंख मलने से कॉर्निया या कंजंक्टाइवा को और नुकसान हो सकता है।
आंख को ढकें: धोने के बाद आंख को साफ कपड़े या स्टेराइल गॉज से हल्के से ढक दें, या पेपर कप से शील्ड बनाकर आंख पर लगाएं।
तुरंत नेत्र-चिकित्सक से संपर्क करें: नज़दीकी नेत्र चिकित्सालय/सिविल अस्पताल/जिला चिकित्सालय चिकित्सा महाविद्यालय के इमरजेंसी विभाग में तुरंत जाएं।