MP News: मध्यप्रदेश में सांसदों की तर्ज पर विधायकों को ताकत देने की तैयारी की जा रही है। CM मोहन यादव ने सहमति दे दी है....
MP News: सब कुछ ठीक रहा तो मप्र में विधायकों को स्वेच्छानुदान की राशि खर्च करने के लिए सांसदों की तरह अधिकार मिलेंगे। विधायक भी अपने क्षेत्र के विकास में धरमशाला समेत 8 अन्य कामों के लिए भी स्वेच्छानुदान के तहत राशि दे सकेंगे। इन नीतिगत बिंदुओं पर शुक्रवार को सीएम डॉ. मोहन यादव ने बैठक में सहमति दी है।
अब अफसर इनको कानूनी दृष्टि से परखेंगे, उसके बाद कैबिनेट अंतिम मुहर लगाएगी। इसके अलावा पट्टा वितरण का पुराने ढर्रे को भी सरकार बदलने जा रही है। अभी नगर निगम क्षेत्र में 8, नगर पालिकाओं में 5 और नगर परिषदों में 3 किमी. के दायरे में पट्टा वितरण की प्रक्रिया काफी जटिल है। इसे आसान बनाया जाएगा।
अग्निवीरों को आरक्षणः सरकार अग्निवीरों को पुलिस, होमगार्ड व फायरमैन जैसे पदों पर भर्तियों में 5% से 30% तक आरक्षण देने की तैयारी में है। सीएम ने इस दिशा में सभी कानूनी पहलुओं की जांच करने के निर्देश दिए हैं।
मंदिरों की सुरक्षाः प्रदेश के सभी बड़े मंदिरों की सुरक्षा सरकार अपने हाथ में लेगी। उज्जैन के बाबा महाकाल मंदिर से इसकी शुरुआत होगी। यहां पूर्व से होमगार्ड को सुरक्षा देने पर प्रक्रिया चल रही है। इसी को आधार बना बाकी मंदिरों में भी निजी सुरक्षा एजेंसियों को हटाया जा सकता है।
पट्टा वितरण में बंदिशे हटेंगीः पट्टा वितरण व्यवस्था में बदलाव कर निकायों में दूरी के दायरे हटाने पर विचार किया गया। पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाएगा।
बॉयोमेट्रिक अटेंडेंसः शासकीय सेवकों के लिए मंत्रालय के बाद जिलों में भी बॉयामेट्रिक अटेंडेंस।
मध्य प्रदेश में सरकार और संगठन के बीच समन्वय को मजबूत करने के लिए भाजपा ने मंत्रियों की परफॉर्मेंस समीक्षा का बड़ा कार्यक्रम तय किया है। ढाई साल का कार्यकाल पूरा करने जा रही मोहन सरकार के मंत्रियों को रविवार और सोमवार को सत्ता-संगठन के प्रमुखों के सामने रिपोर्ट कार्ड रखना होगा। सबसे पहले डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा वित्त-आबकारी व प्रभार के जिलों से जुड़ा लेखा-जोखा पेश करेंगे। अंत में राज्यमंत्री राधा सिंह की बारी आएगी।
रिपोर्ट 18 मुख्य बिंदुओं पर है। सत्ता-संगठन के प्रमुख संबंधित मंत्री को उनकी कमियों से रू-ब-रू कराएंगे। इस कवायद को संभावित मंत्रिमंडल विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है। साथ ही साथ उन विधानसभा सीटों की समीक्षा होगी, जहां भाजपा को 2023 के विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। पार्टी अब इन सीटों पर आगामी रणनीति तैयार करने में जुटी है।