surplus teacher case- एमपी में अतिशेष शिक्षक मामले में हाईकोर्ट जबलपुर ने कड़ा रुख दिखाया है।
surplus teacher case - एमपी में अतिशेष शिक्षक मामले में हाईकोर्ट जबलपुर ने कड़ा रुख दिखाया है। कोर्ट ने एक प्रकरण में शिक्षक के पक्ष में लोक शिक्षण आयुक्त भोपाल को आदेश जारी किया है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में संयुक्त संचालक की अध्यक्षता वाली समिति के आदेश का पालन 10 दिनों में करने की सख्त हिदायत दी है। सागर जिले के भैंसा नाका के उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, में पदस्थ गणित टीचर दीप्ति श्रीवास्तव की याचिका पर कोर्ट ने यह आदेश जारी किया। उनके मामले में विभाग ने अतिशेष को फिर से अतिशेष कर दिया। संभागीय लोक शिक्षण समिति ने दीप्ति श्रीवास्तव के अतिशेष स्थानांतरण को अवैध माना। इसके बाद डीईओ ने आयुक्त लोक शिक्षण को पत्र भेजा लेकिन तब भी कोई कार्यवाही नहीं की गई।
शिक्षिका दीप्ति श्रीवास्तव उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, भैंसा नाका में पदस्थ थीं। यहां दो स्वीकृत पदों के विरुद्ध कथित तौर पर तीन वरिष्ठ गणित टीचर होने के कारण उन्हें अतिशेष घोषित कर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, पथरिया हाट स्थानांतरित कर दिया गया।
इसका विरोध करते हुए दीप्ति श्रीवास्तव ने संयुक्त संचालक की अध्यक्षता वाली समिति के समक्ष आवेदन कर बताया कि भैंसा नाका में कोई पद रिक्त नहीं था। जिला शिक्षा अधिकारी की गलती के कारण यहां नरसिंह पटेल को वरिष्ठ शिक्षक का प्रभार दिया गया था। दोनों स्वीकृत पद पहले से ही भरे हुए थे यानि नरसिंह पटेल को रिक्त पद पर पदस्थ नहीं किया गया था। इसके बावजूद शिक्षिका श्रीवास्तव को अतिशेष घोषित कर उनका तबादला कर दिया गया।
समिति ने जांच के बाद माना कि जिला शिक्षा अधिकारी, सागर की गलती से उन्हें अतिशेष घोषित कर स्थानांतरित किया गया है। ऐसे में समिति ने DEO सागर को शिक्षिका श्रीवास्तव को पुनः भैंसा नाका में पदस्थ करने के निर्देश दिए। इस संबंध में DEO ने आयुक्त लोक शिक्षण को पत्र भेजा लेकिन तब भी कोई कार्यवाही नहीं की गई। इस पर दीप्ति श्रीवास्तव ने हाईकोर्ट जबलपुर में याचिका लगाई।
हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद आयुक्त लोक शिक्षण भोपाल को सख्त आदेश जारी किया। इसमें संयुक्त संचालक सागर के आदेश का पालन 10 दिनों के भीतर करने को कहा गया है।