
MP Jail Food Tender Policy: मध्य प्रदेश जेल विभाग में वर्षों से खाद्यान्न सप्लाई का टेंडर कॉर्टेल चलाने वालों पर विभाग लगाम लगाने जा रहा है। सालाना 2400 करोड़ के कॉर्टेल को खत्म करने नई टेंडर पॉलिसी बनाई है। सभी जेलों को केंद्र के खरीद पोर्टल (जेम) से खरीदी करना अनिवार्य किया है। अभी सभी जेलों में अपने स्तर पर टेंडर किए जाते हैं। शिकायतें आ रही थी कि कुछ अफसर मिलीभगत कर एक ही फर्म या संबंधित फर्मों को ठेका दे रहे हैं। इस नीति से इस पर अंकुश लगेगा। यह नए वित्तीय वर्ष में लागू होगा।
प्रदेश की जेलों में एक माह में करीब 200 करोड़ की खाद्यान्न सामग्री लगती है। नई नीति के अनुसार उप जेलें टेंडर अपने स्तर पर नहीं कर सकेंगी। उन्हें जिला या सेंट्रल जेल से सप्लाई की जाएगी। वे सिर्फ रोजमर्रा की सामग्री जैसे फल, दूध, सब्जियों की खरीदी अपने स्तर पर कर सकेंगे।
ओवर बिलिंगः जेल मुख्यालय ने पांच साल के सभी जेलों के सलाना टेंडर की जांच की तो कई खाद्य सामग्री में ओवर बिलिंग के मामले सामने आए।
रेट असमानताः खाद्यान्न सामग्री के रेट में भी बड़ी असमानताएं मिलीं। चावल, दाल और गेहूं में 50 प्रतिशत तक का अंतर मिला।
गुणवत्ताः गुणवत्ता की शिकायतें भी लगातार आ रही थीं।
अच्छा खाना देना हमारी प्राथमिकता है। लंबे समय से खाद्यान्न सामग्री की ओवर बिलिंग और गुणवत्ता की शिकायतें आ रही थीं। इसे देखते हुए नई नीति बनाई है।-वरुण कपूर, डीजी, जेल
मध्य प्रदेश की जेलों में भोजन की गुणवत्ता को लेकर कैदियों की शिकायतें अब सीधे एआई तक पहुंचेंगी। विभाग ने जेल किचन में बनने वाले भोजन की गुणवत्ता की निगरानी के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) आधारित सॉफ्टवेयर तैयार किया है। किचन में लगाए गए कैमरों के जरिए यह सिस्टम रोजाना तैयार भोजन की तस्वीर और स्थिति का विश्लेषण करेगा। इसमें दाल, सब्जी और रोटी की गुणवत्ता से जुड़े अलग-अलग मानकों की जांच की जाएगी। किसी जेल में लगातार गड़बड़ी मिलने पर इसकी रिपोर्ट मुख्यालय स्थित कंट्रोल रूम तक पहुंचेगी और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी।