
Ujjwal Nikam Prahaar Movie-विशेष लोक अभियोजक उज्ज्वल निकम की जिंदगी पर बनी इस फिल्म 16 अक्टूबर 2026 को मध्यप्रदेश के कई जिलों में एक साथ रिलीज होने वाली है।
Ujjwal Nikam Prahaar Movie: प्रहारः द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ उज्ज्वल निकम… इस फिल्म की इतनी चर्चा क्यों हो रही है? सोशल मीडिया से लेकर राजनीति से जुड़े लोग भी इसकी इतनी सराहना क्यों कर रहे हैं? जाने-माने वकील राज्यसभा सांसद एवं पद्मश्री उज्ज्वल निकम की जिंदगी पर बनी यह फिल्म 16 अक्टूबर 2026 को देशभर में रिलीज होने वाली है। इस फिल्म के रिलीज से पहले उज्ज्वल निकम इंदौर में 15 अक्टूबर 2026 को इस फिल्म के बारे में बात करने वाले हैं। खास बात यह है कि रिलीज से पहले ही फिल्म की विस्तृत जानकारी विकीपीडिया पर अपडेट हो गई है।
पिछले साल जुलाई में इस फिल्म को बनाने की घोषणा की गई थी। इस फिल्म की पटकथा खुद उज्ज्वल निकम की जीवनी पर आधारित है। उज्ज्वल निकम का जन्म 30 मार्च 1953 को महाराष्ट्र के जलगांव में हुआ था। उनकी पत्नी का नाम ज्योति निकम है, बच्चों में अनिकेत निकम और शरवारी निकम है। विशेष लोक अभियोजक के तौर पर उन्होंने कई हाईप्रोफाइल हत्या और आतंकवाद के मामलों में अभियोजन पक्ष का नेतृत्व किया है। इनके बारे में बताया जाता है कि अपने जीवनकाल में वे 37 अपराधियों को फांसी की सजा दिलवा चुके हैं। मराठी परिवार में जन्मे उज्ज्वल निकम के पिता देवराज निकम एक न्यायाधीश और बैरिस्टर थे। जबकि उनकी मां गृहिणी थी। विरासत में मिली कानून की शिक्षा का ही यह असर है कि अब उज्ज्वल का बेटा अनिकेत निकम एक क्रिमिनल लॉयर के रूप में आगे बढ़ा रहा है।
हाल ही में जलगांव आए विशेष लोक अभियोजक उज्जवल निकम ने अपनी बायोग्राफिकल फिल्म 'प्रहार' के बारे में कहा कि जिस पाकिस्तान ने आतंकवादी भेजे थे और आखिर उसका अंजाम क्या हुआ ये सबको मालूम है, लेकिन इसके पीछे किसकी साजिश थी, क्या करना चाहते थे? इसके बारे में कोर्ट में जो दलील पेश की गई थी। अभिनेता राजकुमार राव ने मेरा रोल किया है और उन्होंने मेरा रोल बहुत अच्छे से किया है। इसमें जिसने शहादत दी, तुकाराम ओंबले जी, करकरे जी, कामटे जी, सालस्कर जी ने शहादत दी और जिन पुलिसकर्मी ने कसाब को जिंदा पकड़ा उससे हमने कसाब का हिसाब बराबर कर दिया….ये फिल्म मेरी जीवनी पर नहीं बल्कि ये फिल्म कोर्ट में क्या हुआ और उस समय मुझे क्या कठिनाई का सामना करना पड़ा उस पर ये फिल्म है…16 अक्टूबर से ये फिल्म हर सिनेमा घरों में देखने को मिलेगा।"
भाजपा ने उज्ज्वल निकम को मुंबई की उत्तर मध्य लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया था। तब निकम ने अपने चुनावी शपथ-पत्र में बताया था कि उनकी कुल संपत्ति 43.5 करोड़ रुपए है। उन्होंने 1969 में महाराष्ट्र सेकंडरी बोर्ड पुणे से एसएससी की परीक्षा पास की थी। इसके बाद पुणे विश्वविद्यालय से 1973 में बीएससी की डिग्री हासिल की। पुणे से ही जुड़े एसएस मनियार लॉ कालेज जलगांव से 1976 में एलएलबी की डिग्री ली। निकम के शपथ पत्र के मुताबिक उनके पास आवासीय अपार्टमेंट और कृषि भूमि, 740 ग्राम सोना, 11 किलो ग्राम चांदी और 21.57 करोड़ की संपत्ति है। खास बात यह है कि निकम के खिलाफ कोई आपराधिक मामला न तो दर्ज है न ही लंबित है। निकम को 26/11 के मुंबई आतंकी हमले में सरकारी वकील नियुक्त किया गया था। इसके बाद वे देशभर में चर्चाओं में रहे। उन्होंने जिंदा पकड़े गए आतंकी कसाब के खिलाफ मजबूत पैरवी की और फांसी की सजा दिलवा दी।
उज्ज्वल निकम की फिल्म में मुख्य किरदार राजकुमार राव निभा रहे हैं। डायरेक्टर अविनाश अरुण ने राजकुमार राव के बारे में जब उज्ज्वल को बताया तो उन्होंने वे इस एक्टर को जानते तक नहीं थे। हाल ही में एक इंटरव्यू में भी इसका जिक्र किया था। हालांकि इस एक्टर से मिलकर उज्ज्वल निकम बेहद खुश हुए थे। यह फिल्म 26/11 के आतंकी हमले से जुड़े केस पर बनाई गई है। पिछले 25 जून को इसका टीजर रिलीज हुआ था, जिसका डायलॉग बहुत सुनाई दे रहा है कि कसाब को मारना आसान था, लेकिन उसे किसने भेजा यह साबित करना असली जंग थी। इसके अलावा राजकुमार राव यह यह डायलोग भी चर्चाओं का केंद्र बना हुआ है, जिसमें कहा है कि हमारे यहां तो हमारे यहां तो आतंकवादी के लिए भी संविधान है और उनके यहां आतंकवादी ही संविधान है। यह फिल्म कोर्ट में हुए कसाब के ट्रायल के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म में के प्रोड्यूस दिनेश विजन ने किया है। मैडॉक फिल्म्स के बैनर तले यह प्रोड्यूस हो रही है।
उज्ज्वल निकम मनोनित राज्यसभा सांसद हैं और उन्हें पद्मश्री भी मिल चुका है। निकम 628 आजीवन कारावास और 37 मृत्यु दंड की सजा दिलवा चुके हैं। इनके चर्चित केसों में गुलशन कुमार हत्याकांड (1997), मरीन ड्राइव दुष्कर्म मामला (2005), खैरलांजी नरसिंहार (2006), प्रमोद महाजन हत्याकांड (2006), शक्तिमिल्स सामूहिक दुष्कर्म (2013), प्रीति राठी हत्या (2013), कोपर्डी दुष्कर्म और हत्या मामला (2016), मोहसिन शेख हत्याकांड (2014), कल्याण बस विस्फोट (1991), बाम्बे बम धमाके (1993), गेटवे आफ इंडिया बम धमाक (2003), मुंबई हमला 2008 में भी उज्ज्वल निकम ने सरकार की तरफ से पैरवी की थी।
Updated on:
13 Oct 2026 07:16 pm
Published on:
13 Oct 2026 07:16 pm
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