MP News: ड्रोन से ट्रैफिक की लाइव वीडियो सीधे कंट्रोल रूम तक भेजी जा रही है जिससे कहीं पर भी ट्रैफिक जाम होने पर तुरंत पुलिस सक्रिय होती है।
MP News: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में ट्रैफिक व्यवस्था बेहतर बनाने और सड़क हादसों को कम करने के लिए भोपाल पुलिस ने अब ड्रोन कैमरों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। शहर के प्रमुख चौराहों, व्यस्त रोड और जाम वाले इलाकों में ड्रोन के जरिए निगरानी की जा रही है। पुलिस कमिश्नर ने बताया कि दो ड्रोन ट्रैफिक मॉनिटरिंग के लिए लगाए गए हैं। ये ड्रोन लाइव वीडियो सीधे ट्रैफिक कंट्रोल रूम तक भेज रहे हैं, जिससे पुलिस रियल टाइम में ट्रैफिक की स्थिति पर नजर रख पा रही है। प्रशिक्षित पुलिसकर्मी ड्रोन की लाइव फीड लगातार मॉनिटर कर रहे हैं और जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि शहर के उन चौराहों और इलाकों पर ड्रोन के जरिए विशेष निगरानी रखी जा रही है जहां गलत दिशा में वाहन चलाने और अवैध पार्किंग की शिकायतें ज्यादा मिलती हैं। इसके साथ ही जिन चौराहों या इलाकों में अधिकतर ट्रैफिक जाम की स्थिति बनती है उन जगहों पर भी खास फोकस किया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि ड्रोन की मदद से ट्रैफिक जाम की जानकारी तुरंत मिल जाएगी और मौके पर ट्रैफिक पुलिस पहुंचकर जाम खुलवाएगी।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि ड्रोन का उपयोग अपराधियों और असामाजिक तत्वों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए भी किया जाएगा। पार्कों और सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने, नशा करने और संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी की जाएगी। कोई भी संदिग्ध गतिविधि मिलने पर तुरंत कार्रवाई होगी। इसके साथ ही ड्रोन का उपयोग त्यौहारों, सार्वजनिक कार्यक्रमों और वीआईपी मूवमेंट के दौरान भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी किया जाएगा। पुलिस का मानना है कि हवाई निगरानी से ट्रैफिक और भीड़ प्रबंधन अधिक प्रभावी होगा और नियम तोड़ने वालों में डर भी बनेगा।
ड्रोन कैमरों की मदद से बिना हेलमेट बाइक चलाने, सीट बेल्ट न लगाने, वाहन चलाते समय मोबाइल फोन इस्तेमाल करने, गलत दिशा में वाहन चलाने और अवैध पार्किंग करने वालों की पहचान की जा रही है। वाहन नंबर रिकॉर्ड कर नियम तोड़ने वालों के खिलाफ ऑनलाइन चालान जारी किए जा रहे हैं। पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने बताया कि शुरुआती चरण में दो ड्रोन तैनात किए गए हैं। पीक आवर्स, वीआईपी मूवमेंट और बड़े आयोजनों के दौरान इनका विशेष उपयोग किया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर ड्रोन की संख्या बढ़ाई जा सकती है।