MP News: मध्य प्रदेश सरकार को अबने ही सिस्टम में दबा खजाना मिला है. 1.28 लाख बंद पड़े खातों में सरकार को 2.44 करोड़ रुपए मिले हैं, जिसने सरकार को राहत दी है, लेकिन वित्तीय प्रबंधन पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं...
MP News: बजट संतुलन की जद्दोजहद और मध्य प्रदेश सरकार पर लगातार बढ़ते कर्ज के बीच सरकार को अपने ही सिस्टम में छुपा खजाना मिला है। वित्तीय समीक्षा के दौरान अलग-अलग योजनाओं से जुड़े 1 लाख 28 हजार सरकारी खातों में करीब 244 करोड़ रुपये जमा पाए गए। ये लाखों खाते ऐसे थे जो एक्टिवेट नहीं थे। ऐसी रकम, जो सालों से उपयोग में नहीं आई थी और फाइलों के बीच कहीं दब गई थी।
एमपी वित्त विभाग की रूटीन स्क्रूटनी में जब पुराने बैंक खातों का मिलान शुरू हुआ। तब ये डॉर्मेंट खाते सामने आए। कई खाते उन योजनाओं से जुड़े थे, जिनका काम पूरा हो चुका था या जिनकी प्रशासनिक निगरानी बदल गई थी। समय के साथ ये खाते सक्रिय ट्रैकिंग से बाहर हो गए, लेकिन इनमें जमा राशि अब तक जस की तस पड़ी रह गई।
सूत्रों के मुताबिक, विभाग ने संबंधित बैंकों और Reserve Bank of India के साथ समन्वय की प्रक्रिया शुरू कर दी है, ताकि नियमों के तहत इन खातों में जमा राशि को राज्य के कोष में वापस लाया जा सके। बताया जा रहा है कि बड़े खातों को प्राथमिकता देते हुए चरणबद्ध तरीके से क्लेम की कार्यवाही की जाएगी।
एक तरफ 244 करोड़ रुपए का मिलना वित्तीय दबाव झेल रही सरकार के लिए राहत माना जा रहा है, तो दूसरी तरफ यह सवाल भी जायज है कि इतने बड़े पैमाने पर खाते वर्षों तक निगरानी से बाहर कैसे रह गए? विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना सरकारी वित्तीय प्रबंधन और डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम को और सुदृढ़ करने की जरूरत को दर्शाती है।
राज्य का वार्षिक बजट लाखों करोड़ का होता है, लेकिन वित्तीय अनुशासन में हर अतिरिक्त संसाधन मायने रखता है। खासतौर पर तब, जब योजनाओं के भुगतान, सब्सिडी और विकास कार्यों के लिए नकदी प्रबंधन बड़ी चुनौती बना हुआ हो। अगर यह पूरी राशि सफलतापूर्वक सरकारी कोष में ट्रांसफर हो जाती है, तो यह सरकार के लिए अप्रत्याशित 'बोनस' साबित हो सकती है।
यह मामला सिर्फ 244 करोड़ की खोज का नहीं है, बल्कि वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही की परीक्षा भी है। अब निगाह इस बात पर है कि सरकार इस रकम को कितनी तेजी से अपने खजाने में समेट पाती है वहीं जरूरी ये जानना भी कि भविष्य में ऐसे 'भूले खाते' फिर न बनें, इसके लिए क्या स्थायी व्यवस्था की जाती है?