भोपाल

आंखों में ‘ड्राप’ डालने से पहले हो जाए सावधान, जा सकती है रोशनी!

MP News: डॉक्टर की सलाह के बिना इस्तेमाल की जा रही आई ड्रॉप्स आंखों की रोशनी छीन सकती हैं। भोपाल के बड़े अस्पतालों में स्टेरॉयड से होने वाले सेकंडरी ग्लूकोमा के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जो बिना चेतावनी अंधेपन की ओर ले जा रहा है।
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Updated: 24 Jan 2026, 3:21 AM IST
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steroid eye drops causing blindness glaucoma (फोटो- Freepik)

MP News: क्या आप डॉक्टर से बिना सलाह लिए बाजार से आई ड्रॉप खरीद कर आंखों में लगाते है, तो इसे बंद कर दीजिए। इससे आंखों की रोशनी जा सकती है। नेत्र विशेषज्ञों ने चेताया है कि बिना पर्ची के मेडिकल स्टोर में बिक रही स्टेरॉयड युक्त आई ड्रॉप्स (Steroid Eye Drops) के लगातार और डॉक्टरों की बिना निगरानी में उपयोग से सेकंडरी ग्लूकोमा हो रही है।

राजधानी के अस्पतालों में आंखों की रोशनी छीनने वाली इस बीमारी के मामले बढ़ रहे है। एम्स जेपी और हमीदिया अस्पताल में हर महीने 18 से मामले आ रहे है। हाल ही में भोपाल में डॉक्टर से राय लिए बिना आई ड्रॉप लगाने से एक बच्ची की आखों की रोशनी चली गई थी। गांधी मेडिकल कॉलेज में कॉर्निया ट्रांसप्लांट से उसकी आंखों की रोशनी लौटी।

आई ड्रॉप ही नहीं, दूसरी स्टेरॉयड दवाएं भी जोखिम

नेत्र विशेषज्ञों के मुताबिक खतरा सिर्फ आई ड्रॉप्स तक सीमित नहीं है। एलर्जी, त्वचा रोगों और श्वसन संबंधी बीमारियों में दी जाने वाली स्टेरॉयड दवाएं भी लंबे समय तक लेने पर आंखों के अंदर का दबाव खतरनाक रूप से बढ़ा सकती है।

90 प्रतिशत ग्लूकोमा के मामले पहचान से बाहर

जीएमसी के नेत्र विभाग के अनुसार करीब 90 प्रतिशत ग्लूकोमा (Glaucoma) के मामले शुरुआती दौर में पहचान में नहीं आते। यह बीमारी खामोशी से बढ़ती है। मोतियाबिंद के विपरीत इसमें दर्द या शुरुआती चेतावनी संकेत नहीं होते। 40 वर्ष की उम्र में बेसलाइन नेत्र जांच करानी चाहिए।

डॉक्टरों की चेतावनी

एम्स भोपाल की नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. भावना शर्मा ने कहा कि स्टेरॉयड दवाओं का उपयोग केवल चिकित्सकीय निगरानी में किया जाए और जरूरत खत्म होते ही बंद किया जाए। डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, थायरॉयड रोग, अधिक मायोपिया, लंबे समय तक स्टेरॉयड लेने वाले और आंख में चोट का इतिहास रखने वालों को नियमित नेत्र जांच करानी चाहिए। सावधानी ही आंखों की रोशनी बचा सकती है। (MP News)

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24 Jan 2026, 3:21 AM IST
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