
Tiger- एमपी में चीतों के बाद अब जंगली कुत्तों को बसाया जाएगा। ये वर्षों पहले बहुतायात में पाए जाते थे, अब इनकी संख्या गिनी-चुनी है। इन्हें आंध्रप्रदेश से लाया जाएगा। बदले में मप्र अपने बाघ और गौर देगा। जबकि राजस्थान से सोन चिरैया लाकर घाटीगांव और गांधी सागर में छोड़ीं जाएंगी। वहीं गांधी सागर में पालपुर कूनो नेशनल पार्क से 2 और चीतों को गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में बसाया जाएगा। वन अपराध रोकने के लिए राज्य स्तरीय टॉस्क फोर्स बनेगी। वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए कमांड एवं कंट्रोल रूम, 5 नेशनल पार्कों के पास रेस्क्यू सेंटर बनाए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को वन विभाग की समीक्षा बैठक में इन सभी विषयों पर सहमति दे दी है। मध्यप्रदेश में जंगली हाथियों के समुचित प्रबंध पर भी जोर दिया जा रहा है। इसके लिए जहां महावत के पदों में बढ़ोतरी की जा रही है वहीं हाथियों का प्रबंधन सीखने के लिए अफसरों को पश्चिम बंगाल भी भेजा गया है।
वन विभाग के प्रमुख सचिव संदीप यादव ने मुख्यमंत्री को बताया कि अनूपपुर एवं डिंडौरी के जंगलों में साल बोरर आपदा देखने को मिली है। यह बीमारी 30 साल में एक बार आती है। पिछली बार 1997 में यह बीमारी आई थी। इसके लिए बीमार पेड़ों को हटाया जाएगा।
बैठक में वनभूमि से संबंधित विवादों पर भी चर्चा हुई। राजस्व ओर वन विभाग के बीच भूमि विवादों को खत्म करने के लिए बैठक में अहम निर्णय लिए गए। इसके अंतर्गत वन व्यवस्थापन अधिकारी के पद को और अधिकार युक्त बनाया जाएगा।
वर्ष 2026 में कुल 17.76 लाख मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहण हुआ। तेंदुपत्ता संग्राहकों को इस साल कुल 710.71 करोड़ रुपए की बोनस राशि दी जाएगी।
चालू वर्ष में 300 देवस्थान विकसित किए जाएंगे। पूर्व में 1421 विकसित किए जा चुके हैं।
खनिज परिवहन के लिए वन विभाग परिवहन अनुज्ञा शुल्क बढ़ाएगा।
मानव-वन्य जीव संघर्ष को राज्य आपदा घोषित करने का प्रयास।
कान्हा, बांधवगढ़, पेंच एवं पन्ना नेशनल पार्क के पास वाइल्ड लाइफ रेस्क्यू सेंटर का काम शुरू।
जंगली हाथियों का प्रबंधन सीखने के लिए अफसरों का एक दल पश्चिम बंगाल गया है, ताकि मप्र में जंगली हाथियों का समुचित प्रबंध किया जा सके।
महावत के पदों में बढ़ोतरी की जाएगी।
राजस्व ओर वन के बीच भूमि विवादों को खत्म करने के लिए वन व्यवस्थापन अधिकारी के पद को और अधिकार युक्त बनाया जाएगा।