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पाइपलाइन में बह गया भरोसा! जितना पानी खराब उतना बड़ा कारोबार, बोतलबंद पानी का चमका बाजार

जब नलों के पानी पर भरोसा टूटने लगा, तो बोतलबंद पानी का कारोबार फलने-फूलने लगा।भारत में पानी अब प्यास बुझाने का जरिया भर नहीं, जेब की ताकत और सेहत का सवाल भी बन चुका है।

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drinking water crisis

drinking water crisis: (AI photo)

Drinking Water Crisis bottle water demand: नल का पानी न जानें अब कैसा आए... नगर निगम की पाइपलाइन से टूटता भरोसा अब हर आम आदमी के जहन में है क्या यह पीने लायक है? शहरों से लेकर कस्बों तक पानी की उपलब्धता नहीं, बल्कि साफ और सुरक्षित पानी लोगों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। यही कारण है कि बोतलबंद पानी का बाजार तेजी से फल-फूल रहा है और मजबूरी में लोग अपनी जेब ढीली कर रहे हैं। कहीं 20 रुपए की 1 लीटर पानी की बोतल है, तो कहीं वही पानी की बोतल 100-200 रुपए में बिक रही है। पानी की शुद्धता और सुरक्षा के नाम पर चल रहे इस पूरे खेल के बीच आम आदमी अपनी प्यास और खर्च दोनों के लिए संघर्ष कर रहा है।

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