
Nepal Flood Helpline Number- नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा के बीच बड़ी संख्या में मध्यप्रदेश के नागरिक भी फंसे हो सकते हैं, इसे लेकर एमपी में भी टेंशन बढ़ गया है। राज्य सरकार ने नई दिल्ली में कंट्रोल रूम स्थापित किया है। सीएम मोहन यादव ने हेल्पलाइन नंबर की जानकारी मीडिया को दी है। सीएम मोहन यादव ने नेपाल त्रासदी पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा है कि राज्य सरकार संकट के समय अपने नागरिकों के साथ खड़ी है।
गौरतलब है कि मध्यप्रदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पशुपतिनाथ के दर्शन करने के लिए काठमांडू जाते हैं। हर साल सावन माह में जत्थे के साथ भी लोग जाते है। इसके अलावा नेपाल के रास्ते कैलाश मानसरोवर भी श्रद्धालु जाते हैं।
एमपी के सीएम मोहन यादव (mp cm dr mohan yadav) ने गुरुवार को कंट्रोल रूम स्थापित करने और हेल्पलाइन जारी करने की जानकारी अपने सोशल मीडिया एक्स पर दी है। मोहन यादव के मुताबिक नेपाल में आई भीषण बाढ़ आपदा के संकट में फंसे मध्यप्रदेशवासियों की सहायता एवं आवश्यक जानकारी के लिए राज्य सरकार द्वारा नई दिल्ली में कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है।
नेपाल में यात्रा पर गए मध्यप्रदेश के नागरिक एवं उनके परिजन आवश्यक सहायता और जानकारी के लिए कंट्रोल रूम के हेल्पलाइन नंबर: 011-26772005 तथा व्हाट्सएप्प नंबर: 9818963273 पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त ई-मेल: recp1mpbhawan@mp.gov.in पर भी सूचना दे सकते हैं।
मध्यप्रदेश से हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु नेपाल जाते हैं। खासकर श्रावण के मौके पर देशभर के 12 ज्योतिर्लिंग के दर्शनों के साथ ही नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर दर्शन करने जाते हैं। प्रदेश के कई जिलों से श्रद्धालुओं का जत्था बसों से नेपाल के काठमांडू जाता है। इन श्रद्धालुओं के लिए मध्यप्रदेश में चिंता बढ़ गई है। इसके अलावा मध्यप्रदेश से बड़ी संख्या में हर साल श्रद्धालु कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर भी जाते हैं, यह यात्रा नेपाल के रास्ते की जाती है। हालांकि मध्यप्रदेश के किसी जिले से श्रद्धालुओं के फंसे होने की सूचना नहीं आई है।
इस बीच नेपाल पर्यटन बोर्ड ने भारत से गए ऐसे पर्यटकों की सूची जारी की है, जो वहां फंसे हुए हैं। एएनआई के मुताबिक नेपाल के राष्ट्रीय पर्यटन बोर्ड के अनुसार, रसुवा और नुवाकोट ज़िलों में भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में अचानक आई बाढ़ के बाद 178 भारतीय लापता हैं। नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद रसुवा जिले के पास रसुवागढ़ी और भोटेकोशी नदी के निचले तटीय क्षेत्रों को तीन माह के लिए आपदा संकटग्रस्त क्षेत्र घोषित किया है। आलम यह है कि नेपाल-तिब्बत सीमा से लगे रसुवा क्षेत्र में आई बाढ़ का असर तीन सौ किलोमीटर दूर भारत के कुशीनगर क्षेत्र में भी देखने को मिल रहा है।