
MP Assembly Session : 20 जुलाई से शुरू हुए मध्य प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र तीन बैठकों के बाद दो दिन पहले ही बुधवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया है। सदन की कार्यवाही रात 9.25 बजे तक चली। तीन दिन में 23 घंटे सदन चला। 7765.76 करोड़ के पहले अनुपूरक बजट के साथ विनियोग विधेयक समेत 15 विधेयक पारित किए गए। इनमें यूसीसी, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, सहित अन्य विधेयक शामिल हैं।
बुधवार को मध्य प्रदेश निरसन, निजी विवि (स्थापनास संचालन) संशोधन समेत 6 विधेयक पारित हुए। विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने सदन में बताया, सत्र के दौरान 1756 प्रश्न (900 तारांकित, 856 अतारांकित) थे। 522 ध्यानाकर्षण, 29 स्थगन, 171 शून्यकाल सूचनाएं व 210 याचिकाएं मिलीं। 21 अशासकीय संकल्प की सूचनाएं भी मिलीं। समितियों के 66 प्रतिवेदन सदन के पटल पर रखे गए।
दिल्ली के छात्र आंदोलन पर सदन में विपक्ष ने मुद्दे को तीन बार उठाया। चर्चा की मांग पर अड़ा रहा। लेकिन दोनों डिह्रश्वटी सीएम और मंत्रियों ने आपत्ति ली। कहा, ये विषय मध्य प्रदेश से जुड़ा नहीं है। ये केंद्र का विषय है, इसपर चर्चा नहीं करा सकते। विस अध्यक्ष ने नियमों का हवाला दे स्थगन सूचना खारिज कर दी। तब विपक्ष ने नारेबाजी की, गर्भगृह में पहुंचा। सदन की कार्यवाही 10 मिनट तक रोकनी पड़ी।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने शून्यकाल में दिल्ली में छात्रों की पिटाई पर चर्चा कराने की मांग की। कहा, दिल्ली में मध्य प्रदेश के छात्र भी घायल हुए हैं। नीट पेपर लीक से 2 छात्रा ने जान दी। ये मप्र से जुड़ा विषय है।
डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा, राजेंद्र शुक्ल, मंत्री प्रहलाद पटेल, विश्वास सारंग ने कहा, छात्र आंदोलन केंद्र का विषय है। मप्र में चर्चा नहीं हो सकती। बच्चे देश का भविष्य हैं और उनकी देखभाल की जिम्मेदारी हम सबकी है। नकारात्मक राजनीति के विपरीत हमें सोचना चाहिए कि हम इस समस्या को कैसे हल कर सकते हैं।
सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा, सत्र का विधायी समापन हो गया, लेकिन मप्र की प्रगति, पारदर्शिता, समरसता व नारी सशक्तीकरण के युग का आगाज हुआ। मप्र ईज ऑफ डूइंग बिजनेस कानून औद्योगिक क्रांति लाएगा। श्रम संहिता कानून से भविष्य में 8 के बजाय 12-12 घंटे काम करके, 6 दिन के बजाए, 4 दिन में ही 48 घंटे पूरे कर लें तो 3 दिन मजदूर को आराम मिलेगा।
सिंघार नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा, जनता के सवाल अनुत्तरित हैं। अनुपूरक बजट में किसानों के लिए ठोस प्रावधान नहीं। रोजगार की चिंता नहीं, 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण पर भी सरकार चर्चा से बचती रही। इतना कम समय दिया जाता है कि, विधायक पूरी बात नहीं कर पाते हैं।