Arthritis: खास बात यह है कि आयुर्वेद चिकित्सक पंचकर्म पद्धति से ऐसे मरीजों के ठीक होने का भी दावा कर रहे हैं।
Arthritis: आज बड़ी संख्या में गठिया रोग से लोग परेशान हैं। घुटनों में असहनीय दर्द, चलने में परेशानी और दवाइयां खाकर परेशान हो चुके लोगों के लिए आयुर्वेद की पंचकर्म चिकित्सा पद्धति बड़ी राहत लेकर आई है। खास बात यह है कि आयुर्वेद चिकित्सक पंचकर्म पद्धति से ऐसे मरीजों के ठीक होने का भी दावा कर रहे हैं। पंडित खुशीलाल शर्मा शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय में एडवांस्ड पंचकर्म थैरेप्यूटिक विषय पर तीन दिवसीय कार्यशाला का में यह बात सामने आई है।
यहां पंचकर्म विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. बबीता दाश ने बताया, अस्पताल के पंचकर्म विभाग में घुटनों के दर्द, हड्डियों की समस्याओं, लकवा और चर्म रोगों का उपचार किया जा रहा है। डॉ. दाश ने बताया, पंचकर्म की डिटॉक्सिफिकेशन थेरेपी और वस्ती थेरेपी शरीर से रोग के लिए जिम्मेदार तत्वों को बाहर निकालकर रोग को जड़ से खत्म करती है, जिससे मरीज तेजी से स्वस्थ होता है।
अस्पताल में प्रतिदिन गठिया के 70 से 80 मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या उन मरीजों की है, जिनकी बीमारी को लाइलाज घोषित कर दिया गया था या जो चलने-फिरने में अक्षम हो चुके थे। डॉ. दाश ने बताया कि पंचकर्म की एक्सटर्नल और इंटरनल ऑयल थेरेपी से घुटनों के कार्टिलेज में 'फ्लूइड' पुन: बनने लगता है, जिससे मरीजों को 7 दिन के कोर्स में ही 50 प्रतिशत तक राहत मिल जाती है। चिकित्सा अधीक्षक हरि प्रकाश शर्मा ने बताया कि कार्यशाला में नागपुर से प्रोफेसर सचिन चंडालिया और तिरुपति से प्रोफेसर पी. मुरलीकृष्ण शामिल हुए।
केस 1: सीहोर के 55 वर्षीय रमेश गंभीर गठिया से पीडि़त थे। बिना सहारा लिए बिस्तर से उठना मुश्किल था। कई निजी अस्पतालों के चक्कर काटने के बाद उन्हें सर्जरी की सलाह दी गई थी। खुशीलाल आयुर्वेद अस्पताल में मात्र 10 दिनों की वस्ती और पंचकर्म चिकित्सा के बाद, अब पैदल चलकर अस्पताल आते हैं।
केस 2: विदिशा की 42 वर्षीय सुनीता को पैरालिसिस (लकवा) के कारण शरीर के एक हिस्से ने काम करना बंद कर दिया था। यहां के पंचकर्म विभाग में स्नेहन और स्वेदन (तेल मालिश और सिकाई) के साथ विशेष थेरेपी दी गई।
पंचकर्म केवल मालिश नहीं, बल्कि शरीर के शुद्धिकरण की वैज्ञानिक प्रक्रिया है। हम यहां उन मरीजों को भी ठीक कर रहे हैं, अपने पैरों से चलने की उम्मीद छोड़ चुके हैं। - डॉ. उमेश शुक्ला, प्राचार्य, पं. खुशीलाल आयुर्वेदिक कॉलेज