Patrika Keynote 2025 : पत्रिका समूह के संस्थापक श्रद्धेय कर्पूर चंद्र कुलिश की जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में पत्रिका समूह देशभर में संवाद शृंखला आयोजित कर रहा है। इसी क्रम में भोपाल के पं.खुशीलाल शर्मा शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय एवं संस्थान सभागार में लोकतंत्र और मीडिया विषय पर मंथन।
Patrika Keynote 2025 : पत्रिका समूह के संस्थापक श्रद्धेय कर्पूर चंद्र कुलिश की जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में देशभर में संवाद श्रृंखला पत्रिका KEYNOTE आयोजित कर रहा है। इसी क्रम में आज मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के पं. खुशीलाल शर्मा शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय एवं संस्थान सभागार में लोकतंत्र और मीडिया विषय पर मंथन हुआ। कार्यक्रम में पत्रिका समूह के प्रधान संपादक डॉ. गुलाब कोठारी मौजूद रहे जिन्होंने अपने संबोधन में पत्रिका के 70 सालों के सफर और संघर्ष को बताते हुए कहा कि, पत्रिका लगातार 70 सालों से हर सरकार के खिलाफ विपक्ष की भूमिका निभा रहा है।
पत्रिका समूह के प्रधान संपादक डॉ. गुलाब कोठारी ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि, कोई भी सरकार हो, पत्रिका ने हमेशा सच्चाई का रास्ता अपनाया और सच्चाई कड़वी होती है। सामने वाले को आसानी से पचती नहीं है। ऐसी कोई सरकार नहीं आई होगी जिससे हमारी भिड़ंत नहीं हुई हो। लेकिन हम कभी झुके नहीं, कभी सच्चाई का साथ नहीं छोड़ा, पत्रकारिता के सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। इसी का नाम स्वतंत्र प्रक्रिया है।
लोकतंत्र से अच्छी कोई विधा शासन के लिए नहीं है। हम बहुत आभारी हैं उन पूर्वजों के जिन्होंने हमें ये लोकतंत्र दिया। न्यायपालिका को लेकर कोठारी जी ने कहा न्याय पालिकाएं निर्णय तो देती हैं लेकिन ये न्याय आसानी से नहीं मिलता, आदमी की एड़ियां नहीं, पीढ़ियां घिस जाती हैं। जब तक न्याय मिलता है तब तक उस न्याय को पाने वाला असली हकदार अपना सबकुछ खो चुका होता है।
डॉ. गुलाब कोठारी ने कहा कि मीडिया कोई अकेली इकाई नहीं है, हमारे शरीर की तरह ही मीडिया के भी कई अंग हैं। उन्होंने आगे कहा कि मीडिया चौथा स्तंभ नही है, ये आज आप लिख लेना क्योंकि मीडिया या पत्रकार एक सेतू है जो समाज और तीन स्तंभों के बीच संवाद का काम करता है। अगर पत्रकार ये कहता है कि मैं भारतीय समाज का चौथा पाया हूं, तो इसका एक ही अर्थ है कि वो सरकार के साथ मिल गया और उसने जनता का साथ छोड़ दिया है। इसके अलावा और कोई अर्थ नहीं है। उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि देश का भविष्य, देश का भार आपके कंधों पर है, इस राष्ट्र के कल का निर्माण, देश का स्वरूप आप बनाएंगे, इसलिए इस देश को, लोकतंत्र को और मीडिया को सशक्त रूप से देखने का अभ्यास करना आपके लिए जरूरी है।
डॉ. गुलाब कोठारी ने युवाओं को सीख देते हुए कहा कि वो पढ़ाई और करियर के साथ अपने व्यक्तित्व के निर्माण का ध्यान रखें। उन्होंने उदाहरण देकर युवाओं के मन की उलझन को शांत करते हुए कहा कि सोचें, 'मैं 8 घंटे की नौकरी क्यों चाहता हूं…ये एक बड़ा प्रश्न है ताकि मैं 16 घंटे परिवार का पालन कर सकूं, उन्हें सुंदर जीवन दे सकूं, लेकिन आज क्या हुआ 24 घंटे नौकरी में ही खप गए। इसको समझें एक पत्रकार बन गए बड़ी जगह, सब बोलते हैं कि इतना बड़ा पत्रकार बन गया। बहुत अच्छा लिखता है। 24 घंटे का पत्रकार हो गया मैं। 8 घंटे का पत्रकार रहना चाहिए मुझे और 16 घंटे गुलाब कोठारी की तरह जीना चाहिए मुझे, लेकिन वो 16 घंटे गायब हो गए। इसीलिए अपने व्यक्तित्व का ध्यान रखें, उसका निर्माण करना है। सोचें कि उसी के निर्माण के लिए तो मैं अच्छा करियर ढूंढ़ रहा हूं। ताकि घर-परिवार का जीवन सुंदर बना सकूं।