
भोपाल/ दुष्कर्म की शिकार हुई पीड़िता को अब मामले की शिकायत दर्ज कराने या रिपोर्ट लिखाने के लिए थाने जाकर एफआईआर करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। पीड़िता जहां भी पुलिस को बुलाकर केस दर्ज कराना चाहेगी पुलिस को वहीं पहुंचकर पीड़िता की सुनवाई करके मामला दर्ज करना होगा। एफआईआर दर्ज करते समय पुलिस को पीड़िता के चरित्र के बारे में जानने की बिल्कुल भी आवश्यक्ता नहीं है, यानी रपट लिखते समय इस बात की जरा भी मान्यता नहीं होगी कि, पीड़िता का पूर्व चरित्र कैसा था। अगर कोई भी पुलिसकर्मी दुष्कर्म पीड़िता की रिपोर्ट लिखने में किसी तरह की ढील देता है या रिपोर्ट दर्ज करने से मना करता है तो उसके खिलाफ दंडनीय अपराध दर्ज करने का प्रावधान बनाया गया है। सिर्फ इतना ही नहीं, पुलिस को दुष्कर्म के मामलों में तीन के बजाय सिर्फ दो महीनों में जांच पूरी करनी होगी।
दुष्कर्म के मामलों में अव्वल है मध्य प्रदेश
आपको बता दें कि, देशभर में दुष्कर्म की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक देश में 2018 में रोजाना लगभग 91 से ज्यादा महिलाओं के साथ दुष्कर्म की घटनाएं हुईं, जिनमें से अकेले मध्य प्रदेश में करीब 15 महिलाओं को इन घटनाओं में शिकार बनाया गया। इस हिसाब से मध्य प्रदेश दुष्कर्म के मामलों में एक बार फिर पहले पायदान पर आया है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, साल 2018 में देशभर में कुल 33,356 दुष्कर्म के मामले दर्ज हुए। इनमें से अगर मध्य प्रदेश में हुए दुष्कर्मों का आंकलन किया जाए तो, देश के 16 फीसदी से ज्यादा मामले सिर्फ मध्य प्रदेश में ही हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2018 में यहां दुष्कर्म के 5,433 मामले दर्ज हुए हैं। हैरानी की बात तो ये हैं कि, इनमें से 54 मामले तो ऐसे हैं, जिसमें पीड़िता की उम्र छह साल से भी कम है।
इन परिस्थियों के कारण लिया गया फैसला
ज्यादातर मामलों में देखने में आया है कि गरीब-कमजोर महिलाओं के साथ होने वाली घटनाओं में दबंगों के आरोपी होने से कुछ महिलाएं रिपोर्ट करने से भी घबराती हैं। कई पीड़िताएं थाने जाने की शर्म या डर के चलते रिपोर्ट दर्ज नहीं करा पातीं। ऐसी ही व्यथाओं को मद्देनजर रखते हुए दुष्कर्म पीड़िताओं को राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2019 में ऐसे मामलों में नई गाइडलाइन जारी की है। इसी के आधार पर नई व्यवस्था और नियम को लागू किया जा रहा है।
पीड़िता की असहमति के आधार पर दर्ज होगा मामला
दुष्कर्म पीड़िता के साथ होने वाली घटना के बाद उसकी असहमति को मान्यता दी गई है। अभी तक पुलिस में दुष्कर्म पिड़िता के पूर्व संबंधों को ध्यान में रखकर एफआईआर दर्ज करने में देरी की जाती थी, लेकिन पूर्व संबंध होते हुए भी उसकी इच्छा के विरुद्ध गलत काम किया जाता है, तो पुलिस को इसमें एफआईआर दर्ज करना होगी। साथ ही, ऐसे मामलों में महिला जजों की अदालतों में कैमरे की मौजूदगी में सुनवाई किए जाने के इंतजाम भी जरूरी होंगे।