
Bhopal news: मध्यप्रदेश के किसान जरूरत की बिजली दिन में मांग रहे हैं। सरकार तैयार है। सीएम डॉ. मोहन यादव घोषणा भी कर चुके कि दिन में 10 घंटे बिजली देंगे, लेकिन बिजली कंपनियां इसके लिए तैयार नहीं है। वे दिन में 4 से 6 घंटे ही बिजली दे पा रही है, बाकी की बिजली रात में दी जा रही है। इसका भी टाइम-टेबल तय नहीं है। असल में कंपनियों के पास जो नेटवर्क और क्षमता है, वह दिन में सौर ऊर्जा उत्पादन की अवधि में 100% किसानों को 10 घंटे बिजली देने में सक्षम नहीं है। हद यह है कि केंद्र व राज्य सरकार ने 20 साल में बिजली नेटवर्क को मजबूत करने के नाम पर हजारों करोड़ों रुपए खर्च किए। फिर भी कंपनियां नेटवर्क न होने का रोना रो रही हैं।
ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव मनीष सिंह की सरकार को दी गई रिपोर्ट के मुताबिक खेतों में बिजली देने के लिए मध्य, पूर्व व पश्चिम क्षेत्र बिजली वितरण कंपनियों के पास 8900 कृषि फीडर हैं। इनसे 40 लाख कृषि उपभोक्ताओं को बिजली दी जाती है, लेकिन इनमें से 18% ही दिन में सौर ऊर्जा उत्पादन अवधि में एक समय में सप्लाई देने में सक्षम है। बाकी के 82% के जरिए एक ही समय में सभी को सप्लाई नहीं दी जा सकती।
किसानों के दिन में बिजली देने के दबाव के बीच बिजली कंपनियों ने सरकार से 10 हजार करोड़ रुपए की मांग रख दी है। मध्य, पूर्व व पश्चिम क्षेत्र बिजली वितरण कंपनियां ने 5200 करोड़ व जबलपुर की पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने 4800 करोड़ मांगे हैं। इन कंपनियों के वरिष्ठ अफसरों के दावे हैं कि इस राशि से नेटवर्क को सक्षम बनाएंगे। खासकर ऊर्जा उत्पादन अवधि में सोलर बिजली को सभी फीडरों तक पहुंचाने की क्षमता विकसित करेंगे, ताकि किसानों की जरूरतों को दिन में पूरा किया जा सके।
दुर्गा उत्सव के पहले मप्र में अचानक ऊर्जा संकट गहरा गया था। पत्रिका ने इसे सबसे पहले उजागर किया। तब मांग और आपूर्ति में करीब 4 से 6 हजार मेगावाट का अंतर था। उपभोक्ता सड़कों पर आने लगे। मामला सीएम के सामने कैबिनेट में पहुंचा तो उन्होंने कहा-सोलर ऊर्जा के अधिकतम उपयोग पर जोर दें। तब ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया था कि विभाग ने कार्ययोजना बनाई है। उसी अनुसार आगे बढ़ रहे हैं। यही नहीं, घरेलू, कृषि और औद्योगिक क्षेत्र के उपभोक्ताओं को भी सौर संयंत्र अपनाने और अपनी जरूरत की बिजली खुद बनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं के जरिए मदद भी कर रहे हैं।