
पर्युषण पर्व में रविवार को मंदिरों में उत्तम आर्जव धर्म की आराधना के साथ पूजा-अर्चना हुई। चौक जैन धर्मशाला में मुनिसंघ के सानिध्य में श्रद्धा, भक्ति के साथ पांडुशिला पर भगवान जिनेन्द्र को विराजमान कर कलशाभिषेक किए गए और शांतिधारा हुई। इस मौके पर मुनि विराट सागर महाराज ने कहा कि जहां आर्जव धर्म होने पर मनुष्य से मायाचारी पूरी तरह दूर हो जाती है। आज का मनुष्य पल-पल में मायाचारी करके खुश होता है। आज चाहे सोशल क्षेत्र हो, सामाजिक, राजनीति सभी जगह लोग एक दूसरे से मायाचारी करने में लगे हुए हैं। मुनि निष्पक्ष सागर महाराज ने कहा कि सद्भावों के सद्भाव का नाम आर्जव धर्म है। कुटिल भावों का परिहार्य कर जो निर्मल भावों के साथ जीता है वही आर्जव धर्म में जीता है। इसी प्रकार जवाहर चौक जैन मंदिर, हबीबगंज जैन मंदिर, अशोका गार्डन, चंदन नगर सहित अन्य जैन मंदिरों में भी विशेष आराधना और पूजा अर्चना की गई।
शाहपुरा जैन मंदिर में अभिषेक
पर्युषण पर्व के मौके पर शाहपुरा स्थित पाŸवनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में भी विशेष आयोजन हो रहे हैं। रविवार को मंदिर में भगवान का अभिषेक, शांतिधारा और पूजा अर्चना की गई। इस दौरान पं. वीरेंद्र कुमार द्वारा तत्वार्थ सूत्र के तृतीय अध्याय का वाचन किया गया। महामंत्री संतोष जैन ने बताया कि बच्चों द्वारा णमोकार मंत्र की महिमा की नाटिका प्रस्तुत की गई।