भोपाल

एमपी में 10 हजार कर्मचारियों, अधिकारियों की सेलरी रुकी, रिटायरमेंट के बाद के पोस्ट बेनेफिट पर अड़ंगा

Salary- इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च (आईसीएआर) पहले ही खर्च उठाने से इंकार कर चुकी है

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Feb 03, 2026
Government to deposit a total of 12,000 crore in the accounts of paddy farmers in MP

Salary- मध्यप्रदेश के करीब 10 हजार अधिकारियों, कर्मचारियों को इन दिनों आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। प्रदेश के कृषि विश्वविद्यालयों और कृषि विज्ञान केंद्रों में पदस्थ वैज्ञानिकों व अन्य स्टाफ को यह दिक्कत आ रही है। इनकी सेलरी रोक ली गई है। अधिकांश कर्मचारियों, अधिकारियों का वेतन करीब 6 माह से रुका पड़ा है। इन्हें सितंबर माह 2025 से सेलरी नहीं मिली है। बताया जा रहा है कि देशभर के कृषि विश्वविद्यालयों और कृषि विज्ञान केंद्रों के कर्मचारियों, अधिकारियों के यही हाल हैं। इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च (आईसीएआर) इनका खर्च उठाने से इंकार कर चुकी है और अब राज्य सरकार ने भी अपने हाथ खड़े कर दिए हैं। दोनों के बीच कर्मचारियों के रिटायरमेंट के बाद पोस्ट बेनेफिट पर विवाद के कारण यह स्थिति निर्मित हुई।

6 महीने से वेतन नहीं मिलने से कृषि विज्ञान केंद्रों और कृषि विश्वविद्यालयों में पदस्थ कृषि वैज्ञानिक व अन्य कर्मचारी, अधिकारी परेशान हैं। इसके लिए कई बार हड़ताल भी कर चुके हैं। इधर खर्च के अभाव में कई कृषि विज्ञान केंद्रों का कामकाज ठप हो चुका है।

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कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च (आईसीएआर) करीब दो साल पहले ही खर्च उठाने से इंकार कर चुकी है। आईसीएआर ने 2023 में कृषि विश्वविद्यालयों का खर्च उठाने से मना कर दिया था। हालांकि इस दौरान केंद्र से मदद मिलती रही जिससे अधिकारियों, कर्मचारियों को सेलरी मिलती रही।

मप्र में सितंबर 2025 से सेलरी बंद हो गई। इसी के साथ प्रदेश के जवाहरलाल नेहरू कृषि विवि और राजमाता कृषि विवि ग्वालियर व इनके अंतर्गत आने वाले कृषि विज्ञान केंद्रों में दिक्कतें भी शुरु हो गईं। प्रदेश के सभी कृषि विवि और 44 कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिक व अन्य स्टाफ तभी से वेतन से वंचित हैं।

रिटायरमेंट के बाद पोस्ट बेनेफिट विवाद

दरअसल आईसीएआर और मप्र सरकार के बीच विवाद के कारण यह स्थिति बनी है। आईसीएआर का कहना है कि कर्मचारियों, अधिकारियोें के रिटायरमेंट के बाद पोस्ट बेनेफिट राज्य सरकार को देना चाहिए। राज्य सरकार इससे इंकार कर रही है। सरकार का कहना है कि कृषि विश्वविद्यालयों और आईसीएआर के बीच क्या करार हुआ, उसे इसकी कोई जानकारी ही नहीं है।

आईसीएआर के महानिदेशक ने राज्य सरकार से सहयोग की अपेक्षा की

आईसीएआर के महानिदेशक एमएल जाट ने इस मामले में राज्य सरकारों से सहयोग की अपेक्षा की है। उन्होंने बताया कि
आईसीएआर पिछले सालों तक कृषि विज्ञान केंद्रों के संचालन का काम देख रहा था। वर्तमान में राज्य सरकारों को भी अपना दायित्व निभाना चाहिए।

Published on:
03 Feb 2026 08:40 pm
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