
Rahul Gandhi - एमपी से राज्यसभा सीट के लिए कांग्रेस से प्रत्याशी बनाई गईं मीनाक्षी नटराजन की मुसीबतें लगातार बढ़ती जा रहीं हैं। उनका नामांकन निरस्त कर दिए जाने के बाद से ही भोपाल से लेकर दिल्ली तक में जबर्दस्त हलचल मची है। बुधवार को नई दिल्ली में मीनाक्षी नटराजन के साथ कांग्रेस की केंद्रीय समिति के पदाधिकारियों ने भारत निर्वाचन आयोग के समक्ष अपील की। आयोग ने दो घंटे में फैसला देने का आश्वासन दिया पर ऐसा किया नहीं। कांग्रेस नेता और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी का कहना है कि निर्वाचन आयोग भोपाल के रिटर्निंग अफसर का फैसला पलट सकता है। ऐसे कुछ केसेस हुए भी हैं जहां आयोग ने अपने निर्णय लिए हैं। इधर भोपाल में भी मीनाक्षी नटराजन को केस में कुछ राहत नहीं मिल सकी है। इस बीच प्रदेश के राजनैतिक हल्कों में भोपाल के वरिष्ठ कांग्रेस नेता की पूर्व चेतावनी की चर्चा चल रही है। दिग्विजय सिंह समर्थक इस नेता ने पार्टी को सबसे सुरक्षित विकल्प सुझाया था। इस संबंध में कांग्रेस नेता ने राहुल गांधी Rahul Gandhi को मैसेज भी किया था। उनकी सलाह अनसुनी कर हाईकमान ने मीनाक्षी नटराजन को प्रत्याशी घोषित कर दिया जिनका नामांकन ही निरस्त कर दिया गया है।
राज्यसभा चुनाव और कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने पर देशभर में चल रही जबर्दस्त राजनैतिक गहमागहमी के बीच सीएम डॉ. मोहन यादव बुधवार को दिल्ली पहुंचे। उन्होंने दिल्ली में चुनिंदा नेताओं से मुलाकात की। सीएम मोहन यादव ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को कांग्रेस के प्रत्याशी का नामांकन रद्द किए जाने संबंधी घटनाक्रम की पूरी जानकारी दी।
मप्र से राज्यसभा सीट पर कांग्रेस की प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द हो जाने के बाद जहां कार्यकर्ता हंगामा मचा रहे हैं वहीं पार्टी के कई नेताओं की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। बीजेपी भी बार बार यही कह रही है कि राज्यसभा सीट के लिए कांग्रेस के दिग्गज नेताओं के आपसी संघर्ष के कारण यह स्थिति बनी है।
हकीकत यह है कि राज्यसभा की तीसरी सीट पर बीजेपी की शुरु से ही नजर थी। कांग्रेस की यह सीट दिग्विजय सिंह का कार्यकाल पूरा होने पर खाली हो रही थी। अपने दो उम्मीदवारों के चुन लिए जाने के बाद भी बीजेपी के पास करीब 48 वोट बच रहे थे। तीसरे उम्मीदवार को जिताने के लिए उसे केवल 10 वोट चाहिए थे जिसके लिए कुछ कांग्रेस विधायकों की क्रॉस वोटिंग की बात कही जा रही थी।
बीजेपी की मंशा प्रदेश कांग्रेस भी जानती थी। अपने विधायकों की क्रॉस वोटिंग रोकने जब पार्टी ताने-बाने बुन रही थी, तब वरिष्ठ कांग्रेस नेता नरेश ज्ञानचंदानी ने राहुल गांधी व प्रियंका गांधी को आगाह किया था। उन्होंने मैसेज कर कहा था, प्रत्याशी चुनने में चूक हो रही है। नरेश ज्ञानचंदानी ने स्पष्ट कहा कि दिग्विजय सिंह को ही रिपीट करना सबसे सुरक्षित विकल्प है। हालांकि उनकी सलाह नहीं मानकर पार्टी ने मीनाक्षी नटराजन को प्रत्याशी बना दिया।
प्रत्याशी का नामांकन निरस्त कर दिए जाने के बाद कांग्रेस बेचैन है। इसके लिए दिग्विजय सिंह समर्थक नेता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के रवैए को ही जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। इन नेताओं का कहना है कि दिग्विजय के मैदान में रहने से ऐसी स्थिति नहीं बनती। क्रॉस वोटिंग का खतरा भी नहीं रहता। पार्टी ने हमारी चेतावनी नजरअंदाज की।