Tribal Land Sale: 2009 से 2023 के बीच तीन जिलों में 650 हेक्टेयर जमीन बिक्री की अनुमति दी गई। विधानसभा में खुलासे के बाद अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
MP News: आदिवासियों की जमीन (Tribal Land) गैर आदिवासियों को बेचने का मुद्दा तब विधानसभा में आ गया, जब पूर्व गृहमंत्री बाला बच्चन के सवाल के जवाब में राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने बताया कि बुरहानपुर, खंडवा और इंदौर में साल 2009 से 2023 के बीच 650 हेक्टेयर आदिवासियों की जमीन गैर आदिवासियों को बेचने के लिए कलेक्टर द्वारा अनुमति दी गई। जिसमें बुरहानपुर जिले में 196 हेक्टेयर, इंदौर में 153 हेक्टेयर और खंडवा जिले की 288 हेक्टेयर आदिवासियों की जमीन बेचने की अनुमति करीब 7 कलेक्टरों द्वारा दी गई।
पूर्व गृहमंत्री बाला बच्चन ने कहा कि मुख्य सचिव ने साल 2016-17 में आदेश पारित किया था कि विशेष परिस्थियों में ही गैर आदिवासियों को विक्रय की अनुमति दी जाएगी। लेकिन यहां तो आदिवासियों की सैकड़ों एकड़ जमीन का खेल कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह अनुमतियां रसूखदारों के दबाव में दी गई है। यह पूरे आदिवासी समाज के साथ धोखा है। सरकार को इस मामले की निष्पक्ष जांच करवाकर दोषी अधिकारियों को दंडित करना चाहिए। ताकि भविष्य में ऐसा न हो।
बुरहानपुर जिले में 66 प्रकरणों में से 64 प्रकरणों को अनुमति तत्कालीन कलेक्टर आशुतोष अवस्थी द्वारा दी गई। वहीं इंदौर में कलेक्टर ने 28 और अपर कलेक्टर ने 72 प्रकरणों में बेचने की अनुमति दी। जिसमें राकेश श्रीवास्तव ने कलेक्टर रहते सबसे ज्यादा 16 अनुमतियां दी। उसके बाद पी. नरहरि ने 6, राघवेंद्र सिंह ने 1 और इलैयाराजा और निशांत बरवड़े ने दो-दो प्रकरणों में अनुमति दी। वहीं खंडवा जिले में किस कलेक्टर के दौरान जमीन बेचने की अनुमति दी गई इसकी जानकारी नहीं दी गई है।
साल 2023 में जबलपुर- कटनी जिलों में आदिवासियों की जमीन गैर-आदिवासियों को विक्रय करने की अनुमति देने के मामले में 4 आईएएस अफसरों पर मुकदमा दर्ज हो चुका है। दीपक सिंह, ओमप्रकाश श्रीवास्तव, बसंत कुर्रे और एमपी पटेल पर लोकायुक्त में मुकदमा दर्ज हो चुका है। वहीं 2016 में बैतूल जिले में अपर कलेक्टर पवन जैन भी ऐसे ही मामले में निलंबित किए जा चुके हैं। (MP News)