Health News: ईएनटी विशेषज्ञों का कहना है कि क्रॉनिक साइनोसाइटिस में संक्रमण आंखों की नसों, कान और दुर्लभमामलों में दिमाग तक पहुंच सकता है।
Health News: ठंड के मौसम में वायरल और सर्दी-खांसी के दौरान बार-बार नाक बंद होना, चेहरे में भारीपन, सिरदर्द और गले में बलगम गिरने जैसे लक्षणों को सामान्य समझने की भूल न करें। डॉक्टरों ने इसे लेकर चेतावनी दी है। विशेषज्ञों के अनुसार यह एक्यूट बैक्टीरियल साइनोसाइटिस हो सकता है, जो बच्चों में अधिक देखने को मिल रहा है। समय पर इलाज न होने पर यह संक्रमण आंखों और दिमाग तक फैल सकता है। एम्स, जेपी और हमीदिया अस्पताल की ओपीडी में रोज 20 से 25 बच्चे साइनोसाइटिस के मरीज आ रहे हैं।
ईएनटी विशेषज्ञों का कहना है कि क्रॉनिक साइनोसाइटिस में संक्रमण आंखों की नसों, कान और दुर्लभमामलों में दिमाग तक पहुंच सकता है। इससे आंखों की रोशनी कम होने और मेनिनजाइटिस जैसी गंभीर जटिलताएं हो सकती है।
नाक के आसपास मौजूद साइनस हवा से भरी गुहाएं होती हैं। सर्दी, एलर्जी, प्रदूषण या नाक की बनावट में गड़बड़ी के कारण जब इनका रास्ता बंद हो जाता है, तो बलगम जमा होने लगता है। इससे सूजन और संक्रमण पैदा होता है, जिसे चिकित्सकीय भाषा में साइनोसाइटिस कहा जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार शुरु शुरुआती अवस्था में भाप, सलाइन स्प्रे और एलर्जी की दवाओं से राहत मिल जाती है। बैक्टीरियल संक्रमण होने पर एंटीबायोटिक जरूरी होती है। लंबे समय तक समस्या रहने पर एंडोस्कोपी या सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। धूल-धुएं से बचाव, मास्क का उपयोग, पर्याप्त पानी पीना और सर्दी का समय पर इलाज साइनोसाइटिस से बचाव में सहायक है।
हमीदिया के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. जीवन मीना ने बताया कि वायरल बुखार के बाद सेप्टीसीमिया के कारण बच्चों में दिमागी झटके या सीजर के मामले बढ़े हैं। परिजन इसे मिर्गी समझ लेते हैं, जबकि अधिकतर मामले हानिरहित फेब्राइल सीजर होते हैं। अस्पताल में प्रतिदिन दो से तीन ऐसे मामले सामने आ रहे हैं।
प्रो. डॉ. विकास गुप्ता, ईएनटी विभाग, एम्स के अनुसार साइनोसाइटिस कई प्रकार की होती है। यह कैंसर और गंभीर डायबिटीज जैसे रोग प्रतिरोधक क्षमता कम करने वाली बीमारियों के मरीजों में ज्यादा पाया जाता है। भोपाल में इसके मरीज बढ़ रहे हैं। उन्होंने सलाह दी कि यदि सर्दी-जुकाम 10 दिन से अधिक रहे या चेहरे में दर्द बढ़े, तो डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।