सियासी रण : दोनों दलों के मुखिया की अग्निपरीक्षा का दौर - 29 अप्रेल को प्रदेश की छह सीटों पर चुनाव- सीधी, शहडोल, जबलपुर, मंडला, बालाघाट और छिंदवाड़ा में वोटिंग
भोपाल. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष व मुख्यमंत्री कमलनाथ और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राकेश सिंह की अग्निपरीक्षा का दौर शुरू हो गया है। प्रदेश में लोकसभा के पहले चरण के चुनाव में कमलनाथ और राकेश की लोकसभा सीटों पर मतदान होगा। प्रतिष्ठा की इस लड़ाई में कांग्रेस-भाजपा दोनों ने अपना पूरा जोर इस चरण की छह सीटों पर लगा दिया है। दोनों दल सिक्स मारने और एक-दूसरे के छक्के छुड़ाने में एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 अप्रेल को जबलपुर और सीधी में जनसभा की। इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी जबलपुर और शहडोल में चुनाव प्रचार कर चुके हैं। 29 अप्रेल को प्रदेश की जिन छह सीटों पर वोटिंग होगी उनमें सीधी, शहडोल, जबलपुर, मंडला, बालाघाट और छिंदवाड़ा शामिल हैं। इस चरण में नकुलनाथ और राकेश सिंह के अलावा अजय सिंह, विवेक तन्खा और फग्गन सिंह कुलस्ते जैसे दिग्गज नेताओं के भाग्य का फैसला इवीएम में कैद हो जाएगा। अभी इनमें से केवल एक छिंदवाड़ा सीट कांग्रेस के पास है।
छिंदवाड़ा : कमलनाथ की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा रहे नकुलनाथ का चुनावी राजनीति में पहला कदम है। नकुल के कंधों पर पिता की राजनीतिक विरासत और जनता की अपेक्षाओं का भार है। 2014 में मोदी लहर के बाद भी कमलनाथ ने भाजपा के चौधरी चंद्रभान सिंह को एक लाख से ज्यादा मतों से हराया था। कमलनाथ यहां से नौ बार सांसद रहे हैं। नकुल का मुकाबला भाजपा के आदिवासी नेता नत्थन शाह कवरेती से है।
जबलपुर : प्रदेश के पहले चरण के मतदान वाली सीटों में जबलपुर भी शुमार है। जबलपुर से हैट्रिक बना चुके राकेश सिंह के सामने इस बार कई चुनौतियां हैं। इस बार फिर उनका मुकाबला कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा से है। 2014 के मुकाबले अब हालात बदल चुके हैं। विधानसभा चुनाव में जबलपुर का राजनीतिक परिदृश्य भी बदला है।
सीधी : कांग्रेस के दिग्गज नेता अजय सिंह और भाजपा की रीति पाठक के बीच यहां कांटे का मुकाबला है। अजय सिंह को राजनीतिक प्रतिष्ठा बचानी है तो रीति पाठक के सामने सीट बचाने की चुनौती है। यहां बसपा के रामलाल धनिक समेत 26 प्रत्यशी मैदान में हैं। रीति पाठक को अंदरूनी विरोध से भी निपटना है। रीति पाठक ने पिछला चुनाव मोदी लहर में कांग्रेस के इंद्रजीत पटेल को एक लाख से ज्यादा मतों से हराकर जीता था। अब राजनीतिक परिस्थितियां पिछले चुनाव की तरह उनके अनुकूल नहीं हैं।
मंडला : भाजपा के सबसे बड़े आदिवासी चेहरे फग्गन सिंह कुलस्ते का राजनीतिक भविष्य इस बार के चुनाव पर टिका है। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने यहां फग्गन की जीत मुश्किल कर दी है। कांग्रेस के युवा प्रत्याशी कमल सिंह मरावी उनको कड़ी चुनौती दे रहे हैं।
शहडोल : यहां पर दो महिला नेत्रियों में मुकाबला है। भाजपा की हिमाद्री सिंह और कांग्रेस की प्रमिला सिंह दोनों ने अपनी पार्टी बदलकर उम्मीदवारी ली है। स्थानीय संगठन में दोनों के सामने अंतर्विरोध का संकट है। इस बार का चुनाव ये संदेश जरूर देगा कि यहां के आदिवासी चेहरों पर मुहर लगाते हैं या उनके लिए चुनाव चिन्ह मायने रखता है।
बालाघाट : यहां पर मुकाबला बहुकोणीय हो गया है। भाजपा से बागी बोधसिंह भगत ने भाजपा उम्मीदवार ढालसिंह बिसेन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कांग्रेस के मधु भगत के सामने भी बसपा से चुनाव लड़ रहे कंकर मुंजारे की चुनौती है। जातिय समीकरण भी यहां बहुत मायने रखता है।