
Bhopal News :मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल का एक युवा सुबह उठते ही गुनगुने पानी में नींबू निचोड़ता है, ताकि उसकी बॉडी 'डिटॉक्स' हो सके। दूसरा जिम जाने से पहले कच्चे अंडे गटक रहा है, क्योंकि रील वाले 'इन्फ्लुएंसर' ने कहा था कि, इससे ज्यादा प्रोटीन मिलता है। वहीं, शाहपुरा लेक पर वॉक करने वाले कई लोग आजकल ब्लैक कॉफी में घी मिलाकर पीते नजर आ रहे हैं, इस उम्मीद में कि, उनकी चर्बी बर्फ की तरह पिघल जाएगी।
भोपाल के युवाओं में आजकल सोशल मीडिया के हेल्थ हैक्स को आंख मूंदकर अपनाने का ट्रेंड तेजी से बढ़ा है, जो सेहत के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है।
हाल ही में जर्नल ऑफ मेडिकल इंटरनेट रिसर्च में प्रकाशित 69 अध्ययनों के एक सिस्टेमैटिक रिव्यू ने इस चौंकाने वाले सच से पर्दा उठाया है। इस शोध के अनुसार, सोशल मीडिया पर स्वास्थ्य से जुड़ी करीब 87 फीसदी पोस्ट पूरी तरह भ्रामक और वैज्ञानिक आधार से परे पाई गई हैं।
-नींबू पानी और डिटॉक्स का भ्रम
सुबह नींबू पानी पीना हाइड्रेशन के लिए अच्छा है, लेकिन यह शरीर के टॉक्सिन्स (विषाक्त पदार्थ) नहीं निकालता। हमारे शरीर को साफ करने का यह काम लिवर और किडनी 24 घंटे लगातार करते हैं। वजन में जो थोड़ा-बहुत बदलाव दिखता है, वह बेहतर डाइट और पानी की सही मात्रा के कारण होता है।
-एप्पल साइडर विनेगर (एसीवी)
दावा किया जाता है कि यह चर्बी पिघलाता है। सच यह है कि पानी में एक चम्मच एसीवी लेने से ब्लड शुगर और वजन संतुलित रखने में मामूली मदद मिल सकती है, लेकिन यह कोई फैट कटर नहीं है। इसे सीधे पीने की गलती कभी न करें; यह दांतों के इनेमल और गले की नली को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।
-चिया और फ्लेक्स सीड्स
ये पौष्टिक जरूर हैं, इनमें फाइबर और हेल्दी फैट्स होते हैं जिससे पेट भरा रहता है। लेकिन विज्ञान कहता है कि दुनिया का कोई भी भोजन शरीर के किसी एक खास हिस्से (स्पॉट रिडक्शन) जैसे पेट की चर्बी को अकेले नहीं घटा सकता।
इस संबंध में भोपाल सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा का कहना है कि, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स डॉक्टर नहीं हैं। बिना सोचे-समझे उनके बताए शॉर्टकट्स अपनाने से लिवर-किडनी और पाचन तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। कोई भी डाइट या हेल्थ टिप आजमाने से पहले हमेशा प्रमाणित मेडिकल एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें।