MP News: अवैध कॉलोनियां बनाने वालों पर जुर्माना भी 10 से बढ़ाकर 50 लाख किया जा रहा है।
MP News: मध्यप्रदेश में अवैध कॉलोनियों का विकास रोकने जल्द शहरी कॉलोनी विकास नियम 2021 को ग्राम पंचायत क्षेत्रों में भी लागू किया जाएगा। इसके लिए एकीकृत कॉलोनी विकास नियम 2026 का ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है। मंत्रालय में हुई उच्चस्तरीय बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग और क्रेडाई ने भी इस पर अपनी सहमति दे दी है। इसमें पार्षद से लेकर, बिल्डर, डेवलपर, भू-स्वामी, पुलिस और प्रशासन सभी की जिम्मेदारियां तय की जा रही हैं।
इसके साथ अवैध कॉलोनियां बनाने वालों पर जुर्माना भी 10 से बढ़ाकर 50 लाख किया जा रहा है। हालांकि बैठक में मास्टर प्लान पर अधिकारियों ने मौन धारण कर लिया। इसके बाद क्रेडाई प्रतिनिधियों ने कहा कि ग्वालियर में हाईकोर्ट के दखल के बाद मास्टरप्लान लागू हुआ है। जबलपुर क्रेडाई ने भी मास्टर प्लान लागू कराने हाईकोर्ट में याचिका लगाई है। अब भोपाल और इंदौर में भी नए मास्टर प्लान के लिए भी हाईकोर्ट के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है।
बैठक के दौरान भूमि विकास नियमों की टेबल क्रमांक 42 में संशोधन कर बेस एफएआर में वृद्धि किए जाने का प्रस्ताव रखा गया। इसके लिए अन्य राज्यों के रिफॉर्म के अध्ययन के दस्तावेज सौंपे गए। पूरे प्रदेश में एकरूपता बनाए रखने के लिए टेबल क्रमांक 42 के अनुरूप अनुमतियां जारी करने का सुझाव दिया गया ताकि मास्टर प्लान के विलंब से उत्पन्न विसंगतियों का समाधान हो सके। प्रीमियम एफएआर की दरों को न्यूनतम रखने का अनुरोध किया गया।
-संशोधित नियमों में पार्षद, सरपंच, सचिव आदि की जिम्मेदारी तय की जा रही है कि यदि उन्हें अवैध कॉलोनी की जानकारी या शिकायत मिलती है तो 15 दिन के अंदर एफआइआर दर्ज करानी होगी।
-अवैध कॉलोनी को नगरीय निकाय और पंचायत 15 दिन के अंदर जमीन को मूल स्वरूप में लाने का नोटिस देंगे। यदि कॉलोनाइजर ऐसा नहीं करता है तो निकाय कॉलोनी को ढ़हा कर जमीन अपने कब्जे में ले लेगा। फिर निकाय वहां विकास कार्य कराएगा।
-अवैध कॉलोनियों का विकास रोकने जिला कलेक्टर एक टास्क फोर्स बनाएंगे। यह हर सप्ताह क्षेत्र का निरीक्षण कर रिपोर्ट देगा।
-अभी अवैध कॉलोनियां बनाने वालों को न्यूनतम 3 साल और अधिकतम 10 साल कारावास की सजा का प्रावधान है। नए नियमों में इसे बढ़ाकर न्यूनतम 7 साल और अधिकतम 10 साल की सजा किया जा रहा है।
-अवैध कॉलोनियों के खिलाफ हर कार्रवाई के लिए समय सीमा तय की जा रही है। यदि संबंधित अधिकारी यह कार्रवाई नहीं करते तो शासन उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगा।