Ac compressor blast: मैनिट के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के एचओडी केआर अहरवाल का कहना है, गर्मी में एसी का इस्तेमाल बढ़ जाता है। ऐसे में ध्यान दें, कूलिंग के लिए कंप्रेसर के आसपास का तापमान कंडेंसर के तापमान से 10 डिग्री कम हो।
Ac compressor blast: पिछले दिन दिल्ली की एक इमारत में एसी फटने से नौ लोगों की मौत हो गई और तीन फ्लैटों में आग भड़क गई। घटना से उन लोगों को सबक लेने की जरूरत है, जिन्होंने अपने-अपने घरों या दफ्तरों में एसी लगाए हुए हैं। ऐसे में एसी के इस्तेमाल में सावधानी बरतने की जरूरत है, ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
विशेषज्ञों और तकनीकी जानकारों की मानें, तो एसी से निकलने वाली गर्म हवा बाहरी तापमान को भी बढ़ा देती है। कंडेसर और कंप्रेसर के तापमान में 10 डिग्री का अंतर रखें। खासतौर पर मई में पारा चढ़ता है। ऐसे में गर्मी और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के इस्तेमाल में भी सावधानी बरतना जरूरी है।
मौसम विशेषज्ञ डॉ. जीडी मिश्रा का कहना है, लगातार बढ़ते क्रांक्रिट के जंगल, वाहनों के साथ-साथ एसी की बढ़ती संख्या भी तापमान बढ़ा रही है। एसी जिस तेजी से अंदर ठंडक देता है, उससे अधिक तीव्रता से गर्म हवा बाहर फेंकता है। एसी से निकलने वाली क्लोरोफ्लोरो कार्बन जैसी गैसें ओजोन परत को नुकसान पहुंचाती है, जिससे वायुमंडल का तापमान बढ़ रहा है।
मैनिट के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के एचओडी केआर अहरवाल का कहना है, गर्मी में एसी का इस्तेमाल बढ़ जाता है। ऐसे में ध्यान दें, कूलिंग के लिए कंप्रेसर के आसपास का तापमान कंडेंसर के तापमान से 10 डिग्री कम हो। अक्सर कंडेसर का तापमान 50 डिग्री होने पर कंप्रेसर का तापमान कंडेसर से अधिक हो जाता है, उस स्थिति में एसी के कंडेंसर पर प्रेशर बढ़ जाता है और कंडेंसर फटने की घटना बढ़ जाती है, इसकी वजह गैस लीक या वोल्टेज में उतार-चढ़ाव भी हो सकता है।
बीते महीनों पहले मध्यप्रदेश के सीधी शहर के कांग्रेस कार्यालय रोड स्थित सिटी होटल के बार रेस्टोरेंट का एयर कंडीशनर तेज धमाके के साथ फट गया था। इसने पूरे इलाके में अफरा-तफरी मचा दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार धमाका इतना तेज था कि AC के टुकड़े कमरे से बाहर सड़क तक जा गिरे। आसपास की दुकानों तक मलबा पहुंचने से लोग घबरा गए और कुछ देर के लिए इलाके में दहशत का माहौल बन गया था। जांच में तकनीकी खराबी या अधिक प्रेशर के कारण ब्लास्ट होने की आशंका जताई गई थी।