भोपाल

अमेरिका ने दरवाजे बंद किए तो एशिया, अफ्रीका और यूरोप बनेंगे एमपी की नई मंजिल

Trump Tariff : ट्रंप का 'टैरिफ बम' : क्या अमेरिका खुद करेगा अपनी दवा सप्लाई पर वार, या एमपी लिखेगा नए बाजारों की नई इबारत? 100 फीसदी टैरिफ की घोषणा से फार्मा सेक्टर में मचा भूचाल, उद्यमियों ने बनाया प्लान-बी।
2 min read
Trump Tariff
Trump Tariff (ट्रंप का 'टैरिफ बम Photo Source- Patrika)

Gwalior/Bhopal News : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आयातित जेनेरिक दवाओं पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा ने दुनिया के फार्मा कारोबार में हलचल मचा दी है। हालांकि, ये व्यवस्था अगस्त 2028 से चरणबद्ध तरीके से लागू होनी है, लेकिन मध्य प्रदेश के दवा उद्योग ने अभी से नई रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। उद्योग जगत का साफ कहना है कि, अगर अमेरिका भारतीय दवाओं पर अतिरिक्त टैक्स लगाता है तो नुकसान सिर्फ भारत का नहीं, सबसे बड़ा झटका अमेरिकी मरीजों और वहां की स्वास्थ्य व्यवस्था को लगेगा। ऐसे में प्रदेश के दवा निर्माता अब नए वैश्विक बाजारों की ओर तेजी से कदम बढ़ाने की तैयारी में हैं।

प्रदेश के पीथमपुर, इंदौर, देवास, मालनपुर, भोपाल और जबलपुर से हर साल बड़ी मात्रा में जेनेरिक दवाएं अमेरिका भेजी जाती हैं। मध्य प्रदेश में करीब 350 छोटी-बड़ी फार्मा इकाइयां संचालित हैं, जिनमें लगभग 100 कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्यात कर रही हैं।

एमपी की दवाओं पर दुनिया का भरोसा

प्रदेश से पैरासिटामोल, मेटफॉर्मिन, एमोक्सिसिलिन, एजीथ्रोमाइसिन, ओमेप्राजोल, एटोरवास्टेटिन, इबुप्रोफेन जैसी जेनेरिक दवाओं के साथ वैक्सीन का भी बड़े पैमाने पर निर्यात होता है। अमेरिका के अलावा कनाडा, ब्राजील, यूके, जर्मनी, फ्रांस, रूस, यूएई, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, नाइजीरिया, वियतनाम, थाईलैंड, बांग्लादेश, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड सहित दर्जनों देशों में मध्यप्रदेश की दवाओं की मजबूत मौजूदगी है।

दुनिया का भरोसा हमारी ताकत

बेसिक ड्रग डीलर एसोसिएशन मध्यप्रदेश के अध्यक्ष जेपी मूलचंदानी का कहना है, भारतीय दवाओं ने गुणवत्ता और किफायत के दम पर वैश्विक पहचान बनाई है। अमेरिका में जेनेरिक दवाओं की बड़ी हिस्सेदारी भारत के पास है। यदि टैरिफ लागू होता है तो निर्यातक दूसरे देशों में कारोबार बढ़ाएंगे और नए बाजार तलाशेंगे।

'फैसला अमेरिका के लिए भी महंगा साबित होगा'

एमपी फेडरेशन ऑफ फार्मा इंटरप्रेन्योर, स्टेट ब्रांच के चेयरमैन हिमांशु शाह का कहना है, ऐसा फैसला अमेरिका के लिए भी महंगा साबित होगा, इसलिए इसे लागू करना आसान नहीं होगा। वहीं टेवा एपीआइ इंडिया लिमिटेड, मालनपुर के एडमिन एसपी पांडे के अनुसार उनकी कंपनी का अधिकांश निर्यात इजरायल के माध्यम से अमेरिका पहुंचता है, इसलिए सीधा असर सीमित रहने की संभावना है।

संकट नहीं, अवसर भी है…

पीथमपुर औद्योगिक एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ.गौतम कोठारी का कहना है, उद्योग पहले ही वैश्विक चुनौतियों का सामना कर रहा है। यदि अमेरिका अतिरिक्त टैरिफ लगाता है तो मध्यप्रदेश के उद्योग नए देशों में निर्यात बढ़ाकर नुकसान की भरपाई करेंगे। उनका मानना है कि भारतीय दवाओं की गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धी कीमतें नए बाजारों में भी मजबूत अवसर पैदा करेंगी।

फैक्ट फाइल

-350 से अधिक फार्मा इकाइयां मध्यप्रदेश में संचालित।

-100 से ज्यादा कंपनियां निर्यात कारोबार से जुड़ी।

-6 प्रमुख औद्योगिक शहरों से अमेरिका को दवा निर्यात।

-30 से अधिक देशों में पहुंच रही हैं मध्यप्रदेश की जेनेरिक दवाएं।

एक नजर इस पर भी…

-अमेरिका भारतीय जेनेरिक दवाओं का बड़ा खरीदार है।

-टैरिफ लागू होने पर अमेरिकी बाजार में दवाएं महंगी हो सकती हैं।

-मध्य प्रदेश के उद्योगपति अब एशिया, अफ्रीका, यूरोप और पश्चिम एशिया में नए बाजार तलाशने की तैयारी में हैं।

-उद्योग का दावा-भारतीय दवाओं की गुणवत्ता और कम कीमत ही सबसे बड़ी ताकत है।

Updated on:
03 Aug 2026 01:33 pm
Published on:
03 Aug 2026 01:23 pm