
UCC in MP: मध्यप्रदेश में भी समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। इसे लेकर प्रदेश सरकार ने हाईपावर कमेटी गठित कर दी है। न्यायमूर्ति रंजना प्रसाद देसाई को इस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है। इसके अलावा पांच अन्य लोगों को भी कमेटी में शामिल किया गया हैं। 6 सदस्यीय यह कमेटी 60 दिनों में अपनी रिपोर्ट सरकार के समक्ष पेश करेगी।
बता दें कि कुछ समय पहले ही सीएम मोहन यादव ने ऐलान किया था कि एमपी भी अब गुजरात की राह पर आगे बढ़ेगा। यहां भी समान नागरिक संहिता (UCC) लागू की जाएगी। इसके लिए जल्द ही एक कमेटी गठित की जाएगी। जो 6 महीनें में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। अब एमपी में UCC को लेकर नया अपडेट यही है कि सरकार ने इसके लिए 6 सदस्यीय टीम गठित कर दी है।
सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जज रंजना प्रसाद देसाई की अध्यक्षता में कमेटी का गठन (UCC ) किया गया है। इसके साथ ही इस कमेटी में पांच सदस्य सेवानिवृत्त आईएएस शत्रुघ्न सिंह, कानूनविद अनूप नायर, शिक्षाविद गोपाल शर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता बुधपाल सिंह और सामान्य प्रशासन विभाग के अपर सचिव अजय कटेसरिया को शामिल किया गया है।
मध्यप्रदेश ने UCC लागू करने की दिशा में अहम कदम बढ़ा दिया है। प्रदेश अब उत्तराखंड और गुजरात की राह पर आगे बढ़ रहा है। राज्य के विधि एवं विधायी कार्य विभाग ने इस उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति के गठन का आदेश जारी कर दिया है। यह कमेटी प्रदेश में विवाह, तलाक, गोद लेने और विरासत जैसे निजी कानूनों का अध्ययन कर एक समान कानूनी ढांचा तैयार करने का ब्लूप्रिंट तैयार करेगी। बता दें कि जस्टिस रंजना देसाई ने ही उत्तराखंड में UCC का ड्राफ्ट तैयार करने वाली समिति का नेतृत्व किया था।
बताते चलें कि समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code/UCC) सबसे गोवा में पुर्तगाली समय 1867 में ही लागू कर दिया गया था। लेकिन स्वतंत्र भारत में इसे लागू करने वाला पहला राज्य उत्तराखंड बना। उत्तराखंड ने 27 जनवरी 2025 को आधिकारिक रूप से इसे लागू कर दिया था। इस कानून का उद्देश्य जहां विवाह, तलाक, संपत्ति, विरासत और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत नागरिक मामलों में धर्म, जाति या लिंग के भेदभा को खत्म कर सभी नागरिकों के लिए समान कानून लागू करना है। इसकी खासियत ये है कि यह कानून लिव इन रिलेशनशिप के पंजीकरण को भी अनिवार्य बनाता है। बहुविवाह पर रोक लगाता है। वहीं भारतीय पुरुष सत्तात्मक समाज में महिलाओं को भी समान अधिकार देता है।