भोपाल

एमपी की आइएएस उषा परमार ने 14 साल किया इंतजार, फिर मिला बड़ा दायित्व, सीएम ने की थी पहल

IAS Usha Parmar : उषा परमार 2011 बैच की आइएएस, 30 सितंबर को पेशी, पन्ना कलेक्टर के खिलाफ गैर- जमानती वारंट जारी होने से प्रशासनिक हलचलें तेज
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Sep 23, 2026
उषा परमार @CollectorPanna
IAS उषा परमार - Image credit @CollectorPanna

IAS Usha Parmar : मध्यप्रदेश हाईकोर्ट जबलपुर ने पन्ना कलेक्टर उषा परमार के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है। एक अवमानना मामले में यह वारंट जारी किया गया है। पन्ना कलेक्टर उषा परमार के खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट के तामीली की जिम्मेदारी एसपी को सौंपी गई है। हाईकोर्ट ने उन्हें अगली सुनवाई 30 सितंबर को उपस्थित कराने के निर्देश दिए हैं। गैर-जमानती वारंट जारी होने के साथ ही कलेक्टर उषा परमार सुर्खियों में आ गईं। उन्हें करीब 14 साल के इंतजार के बाद कलेक्टरी मिली थी। उषा परमार को यह बड़ा दायित्व, सीएम मोहन यादव की पहल पर मिला।

हाल ही में कोर्ट ने अवमानना के अन्य मामले में तत्कालीन प्रमुख सचिव राजस्व विवेक पोरवाल, सागर कलेक्टर संदीप जीआर के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था। आदेश का पालन होने के बाद इन अधिकारियों के वारंट रद्द किए गए।

उषा परमार 2011 बैच की आइएएस

अब हाईकोर्ट ने पन्ना कलेक्टर उषा परमार के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है। इसी के साथ वे चर्चा में आ गई हैं। उषा परमार 2011 बैच की आइएएस हैं। उनके पति अरुण परमार भी 2012 बैच के आइएएस हैं।

आइएएस उषा परमार को पिछले साल अक्टूबर माह में पन्ना की कलेक्टरी दी गई थी। उन्हें पहली बार कलेक्टर बनाया गया था। प्रमोटी महिला आईएएस उषा परमार उस समय तक बेहद निराश सी हो चुकी थीं। उन्हें लगने लगा था कि कलेक्टर की कुर्सी पर बैठने का मौका अब नहीं मिल सकेगा, वे कलेक्टर बने बिना ही सुपर टाइम स्केल में पदोन्नत हो जाएंगी।

2025 में अक्टूबर माह में जब प्रदेश में प्रशासनिक फेरबदल किया गया तो आइएएस उषा परमार की मन की मुराद मानो पूरी हो गई। खास बात यह है कि सामान्य प्रशासन विभाग की सूची में उनका नाम नहीं था। मुख्यमंत्री मोहन यादव के हस्तक्षेप के बाद आइएएस उषा परमार को पन्ना का कलेक्टर बनाया गया। तब उनके साथ 3 अन्य महिलाओं को भी जिलों की कमान सौंपी गई थी।

क्या है मामला

पन्ना कलेक्टर उषा परमार पर अवमानना का यह मामला रिटायर्ड कर्मी जाविन आरा रिजवी से जुड़ा है। वे कलेक्ट्रेट में सेक्शन ऑफिसर थीं। नियमितीकरण की मांग वाली याचिका कोर्ट ने 13 अगस्त 2025 को निराकृत कर कलेक्टर को 90 दिन में निर्णय लेने के निर्देश दिए। आदेश का पालन न होने पर अवमानना याचिका लगाई जिसपर कोर्ट ने सख्ती दिखाई।

Updated on:
23 Sept 2026 12:10 pm
Published on:
23 Sept 2026 12:09 pm