इंडियन टीम की स्टार प्लेयर बन गई वंदना कटारिया
भोपाल. खेल में उनका killer instinct दिखाई दिया था। ब्रिटेन के खिलाफ 2-0 से पिछड़ने के बाद भी वे नर्वस नहीं हुई थी बल्कि दोगुने उत्साह से हमले करने में जुट गई थीं। गुरजीत कौर के लगातार दो गोलों के बाद वंदना कटारिया ने गोल दागकर टीम को लीड दिला भी दी। इसपर भी जब टीम अंतत: हार गई तो वंदना की आंखों से आंसू छलक ही पड़े।
टोक्यो ओलिंपिक में शुक्रवार को एक बार फिर भारतीय महिला हॉकी टीम ने गजब का प्रदर्शन किया। हालांकि टीम ग्रेट ब्रिटेन से हार गई और ब्रांज मेडल जीतने से भी चूक गईं पर टीम ने सभी का दिल जीत लिया। ब्रिटेन को 2-0 की बढ़त मिल चुकी थी पर भारतीय टीम ने 4 मिनट में 3 गोल कर बाजी पलट दी थी। एमपी में हाकी के गुर सीखनेवाली टीम की स्टार फारवर्ड वंदना कटारिया ने इस मैच में भी कमाल कर दिखाया था।
ताबड़तोड़ हमले कर वंदना ने 29वें मिनट में आखिरकार गोल दाग ही दिया। वंदना के इस गोल के साथ ही टीम इंडिया को 3-2 की बढ़त मिल गई। बाद में ब्रिटेन ने 4-3 से मैच जीत जरूर लिया पर मैच में अपने दमदार प्रदर्शन से वंदना ने अपनी काबिलियत फिर साबित कर दिखाई। टोक्यो ओलिंपिक में वे पूरे रंग में दिखाई दीं।
भारतीय महिला हॉकी टीम को इस मुकाम तक लाने में वंदना कटारिया का सबसे अहम रोल रहा है. ओलिंपिक में उन्होंने कुल चार गोल दागे और टीम को सेमी फाइनल तक पहुंचाने में अपना योगदान दिया। अफ्रीका के खिलाफ बनाई गई उनकी हैट्रिक तो ओलिंपिक इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गई है। यही वो मैच था जिसने इंडिया को ढीलीढाली टीम की इमेज से उबारकर बुलंदियों पर पहुंचा दिया था।
वंदना के साथ ही इस टीम में तीन अन्य ग्वालियर गर्ल्स भी थीं जिन्होंने अपने प्रदर्शन से भारतीय महिला हॉकी टीम को नई उंचाई प्रदान की है। पी सुशीला चानू, रीना खोखर और मोनिका मलिक भी इंडियन टीम में शामिल थी। ये सभी ग्वालियर स्थित मध्यप्रदेश महिला हॉकी अकादमी में प्रशिक्षण ले चुकी हैं. यहां कोच परमजीतसिंह ने इनका हुनर तराशा था।