भोपाल

कथक और कुचिपुड़ी से पेश किए मां दुर्गा और कृष्ण के विभिन्न रूप

रवीन्द्र भवन में इंटरनेशनल परफॉर्मिंग आर्ट फेस्टीवल की संगीत सभा का आयोजन
2 min read
Feb 25, 2019
dance08
कथक और कुचिपुड़ी से पेश किए मां दुर्गा और कृष्ण के विभिन्न रूप

भोपाल। रवींद्र भवन में शनिवार को इंटरनेशनल परफॉर्मिंग आर्ट फेस्टीवल की संगीत सभा में देशभर से आए कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति के जरिए समां बांधा। इस मौके पर उद्योगपति नवीन जिंदल की पत्नी नृत्यांगना शालू जिंदल की कुचिपुड़ी नृत्य प्रस्तुति हुई। वहीं माया के. निगम ने कथक नृत्य पेश किया। इसके साथ ही आरुषि संस्था के स्पेशल कलाकारों की गजल प्रस्तुति और नासिर सबीर व समूह की कव्वाली के जरिए सूफियाना रंग घोला।

कार्यक्रम में कुचिपुड़ी नृत्यांगना शालू जिंदल ने प्रस्तुति की शुरुआत राग मोहनम आदि ताल में 'तरंगम" से की। इसमें उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं को दिखाया। इसकी खास बात यह है कि नृत्यांगना थाली पर नृत्य करती है। कुचिपुड़ी का यह यूनीक प्रजेंटेशन है। ऐसा कहा जाता है कि जब कोई नृत्यांगना थाली पर नृत्य करती है तो उसका संसार से संबंध चला जाता है। नृत्यांगना की आत्मा का परमात्मा से मिलन हो जाता है। क्योंकि थाली पर खड़े होते है।

स्वरचित कविता से दी शहीदों को श्रद्धांजलि
गुरु गीतांजलि लाल की शिष्या कथक नृत्यांगना माया के. निगम ने अपनी प्रस्तुति में हाल ही में हुए पुलवामा हमले में शहीद हुए सैनिकों को अपनी स्वरचित कविता के जरिए श्रद्धांजलि दी। साथ ही शक्ति और नारी शक्ति को नृत्य में पिरोकर पेश किया।

उन्होंने प्रस्तुति की शुरुआत दुर्गा स्तुति के साथ की। इसके बाद स्वरचित कविता वो सलामत हैं... के जरिए एक शहीद की पत्नी के भावों को पेश किया। इसमें उन्होंने दिखाया, सैनिक की पत्नि को जब पति की शहादत का पैगाम मिलता है तो वो दुल्हन बनी हुई है। वह धीरे धीरे अपना श्रृंगार उतार रही है और कहती जा रही है वो सलामत हैं....। वहीं, अरुषि के बाल कलाकारों ने खुशी गुप्ता व सरगम कुशवाहा ने गजलें पेश की।

नृत्य के लिए परिवार के साथ यात्रा छोडऩा पड़ती है
मेरा भोपाल आना जाना लगा रहता है, लेकिन बतौर नृत्यांगना पहली बार रूबरू हो रही हूं। मैं जब नौ साल की थी, तब मैंने कथक नृत्य प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया था। कॉलेज लेवल तक नृत्य करती रही।

पंजाब यूनिवर्सिटी से मेरा ग्रेजुएशन हुआ इसके बाद मैं मुंबई चली गई। पंजाब से मुंबई गई, तब मेरी कथक की यात्रा तो जारी थी, लेकिन नृत्य मेरे जीवन में बहुत नहीं था। यह कहना है कुचिपुड़ी नृत्यांगना शालू जिंदल का।

हमारी पर्सनल लाइफ जरूर कम हो जाती है। कई बार खुद के लिए समय नहीं मिलता है, लेकिन जो आत्मसंतुष्टि मिलती है वह मेरी हर थकान को दूर कर देती है। मैं अपने फे्रंड्स के साथ लंच नहीं कर सकती, हॉलीडेज पर नहीं जा सकती। मैंने न जाने कितने हॉलीडेज मिस किए हैं परिवार के साथ, क्योंकि मुझे डांस प्रैक्टिस करनी थी। हम दिल्ली में ही हॉलीडेज मना लेते थे।

Updated on:
25 Feb 2019 10:48 am
Published on:
25 Feb 2019 10:48 am