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सुप्रीम कोर्ट की सख्ती पर एक्टिव हुई कांग्रेस, जीतू पटवारी ने राष्ट्रपति को भेजा पत्र

Jitu Patwari : दवाओं की मनमानी कीमतों पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी, दवा सस्ती करने जीतू पटवारी ने राष्ट्रपति को पत्र भेजा
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जीतू पटवारी ने दवा सस्ती करने राष्ट्रपति को भेजा पत्र (फोटो सोर्स: Patrika)

Jitu Patwari : जीवनरक्षक दवाओं की मनमानी कीमतों पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की है। देश की शीर्ष अदालत की सख्ती के बाद मध्यप्रदेश कांग्रेस भी सक्रिय हुई। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी ने दवा की कीमतें कम करने के लिए राष्ट्रपति को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि कैंसर मरीजों और उनके परिवारों के लिए ऐसी व्यवस्था बनाने की आवश्यकता है जिससे दवा की कीमत में उन्हें राहत मिल सके।

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी ने कैंसर दवाओं की कीमत पर नियंत्रण के लिए आवाज उठाई है। इसके लिए उन्होंने राष्ट्रपति को एक पत्र प्रेषित किया है। जीतू पटवारी ने अपने पत्र में देश में कैंसर के मरीजों और उनके परिवारों के लिए एक पारदर्शी व जनहितैषी व्यवस्था बनाने की जरूरत जताई गई है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक तथा X पर भी यह पत्र पोस्ट किया है।

कैंसर मरीजों की मजबूरी का नाजायज फायदा न उठाएं

राष्ट्रपति को भेजे अपने पत्र में प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी ने लिखा कि कैंसर मरीजों और उनके परिवारों के लिए एक ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए जिसमें दवाओं की कीमतें उनकी लाचारी या मजबूरी देखकर तय न हो। उन्होंने केंद्र सरकार और संबंधित विभागों से दवाइयों को सस्ता करने की मांग की। जीतू पटवारी ने अपने पत्र में कैंसर के महंगे इलाज और जीवन रक्षक दवाओं के दाम नियंत्रित करने की बात कही। उन्होंने आग्रह किया है कि ये दवाएं आम जनता की पहुंच में लाने की कोशिश की जाए।

दवा की कीमत मरीज की मजबूरी देखकर तय न हो

जीतू पटवारी ने अपने एक्स हेंडल पर लिखा:

माननीय राष्ट्रपति महोदया,
कैंसर मरीजों, उनके परिवारों को ऐसी व्यवस्था की आवश्यकता है, जिसमें दवा की कीमत मरीज की मजबूरी देखकर तय न हो!

सुप्रीम कोर्ट ने की सख्त टिप्पणी

देश की शीर्ष अदालत ने कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की जरूरी दवाओं की कीमतों में 10 गुना तक के भारी अंतर पर कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे दिन-दहाड़े डकैती और मरीजों के साथ सरासर लूट करार दिया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि कैंसर की जो दवा रिटेलर को सिर्फ 2700 रुपए में मिलती है, उसकी अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) 27000 रुपए तक छापी जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि ऐसी महंगी कीमतें वसूलना एक्सटॉर्शन (उत्पीड़न) है, जहां इलाज के लिए लोगों को अपने घर और गहने तक बेचने पड़ते हैं। कोर्ट ने इस बात पर भी चिंता जताई कि अस्पताल ऊंची कीमतों पर ये दवाएं खरीदते हैं और फिर आयुष्मान भारत, CGHS, DGHS और आयुष जैसी सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं या रीइम्बर्समेंट के जरिए जनता के टैक्स के पैसों से इसका भुगतान वसूलते हैं।