भोपाल

नाम VIP रोड, सुरक्षा जीरो ! 7 खतरनाक टर्निंग पॉइंट कभी भी ले सकते लोगों की जान, भोपाल में संभलकर चलें

VIP Road: भोपाल की वीआईपी रोड पर सुरक्षा इंतजाम नदारद, सात खतरनाक टर्निंग पर चेतावनी या स्पीड ब्रेकर नहीं। आरजीपीवी बस हादसे के बाद भी तेज रफ्तार जारी, विशेषज्ञ स्पीड गवर्नर और तकनीकी निरीक्षण की मांग कर रहे।
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Updated: 29 Oct 2026, 7:34 AM IST
वाआईपी रोड, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source: AI Image)
वाआईपी रोड, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source: AI Image)

Bhopal news: मध्यप्रदेश के भोपाल शहर में वीआईपी रोड कहने के लिए वीआईपी है लेकिन यहां सुरक्षा के कोई इंतजाम मौजूद नहीं है। पांच किमी लंबी इस सड़क पर सात ऐसी टर्निग है जहां जरा सी चूक हादसे की वजह बन सकती है। हैरानी वाली बात है कि जिस वीआईपी रोड पर एक रोज पहले आरजीपीवी की बस की दुर्घटना हुई वहां बुधवार को कोई इंतजाम नहीं थे। ट्रैफिक पुलिस रोज की तरह रेतघाट पर तैनात रही, चालानी कार्रवाई जारी रहीं लेकिन वीआईपी रोड के अंधे और खतरनाक टर्निंग पर चेतावनी देने कोई व्यवस्था नहीं की गई। नतीजा बुधवार को यहां 90 और इससे ज्यादा गति से वाहन दौड़ते नजर आए। ट्रैफिक पुलिस के जानकारों की राय में यहां स्पीड गर्वनर और ब्रेकर लगाने बेहद जरूरी है। वाहनों की तेज रफ्तार यहां दोबारा दुर्घटना की वजह बन सकती है। इसी स्पॉट पर चंद रोज पहले एक आयल टेंकर और निजी संस्थान की बस पलट चुकी है।

अंधे मोड़ पर न संकेतक, न प्रभावी निगरानी

वीआइपी रोड पर कई स्थानों पर मोड़ और सड़क की बनावट वाहन चालकों के लिए जोखिम पैदा करती है। ऐसे संवेदनशील स्थानों पर पर्याप्त चेतावनी संकेतक, गति सीमा के बोर्ड और कैमरों की व्यवस्था जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी खामियों की पहचान कर दुर्घटना संभावित स्थानों पर विशेष इंतजाम किए जाने चाहिए, ताकि तेज रफ्तार वाहनों पर नियंत्रण रखा जा सके।

स्पीड गवर्नर की जांच कौन करेगा ?

स्कूल बसों में स्पीड गवर्नर जैसे सुरक्षा उपकरणों की मौजूदगी और उनकी कार्यशीलता की नियमित जांच जरूरी है। इसके बावजूद बसों की रफ्तार पर नियंत्रण को लेकर स यातायात पुलिस की निगरानी पर सवाल उठ रहे हैं। तेज रफ्तार में सड़क पर चल रहे दूसरे लोगों के लिए चलने वाली बसें बच्चों के साथ भी खतरा बन सकती है।

खतरनाक सड़कों का हो तकनीकी निरीक्षण

पूर्व यातायात डीएसपी सतविंदर सिंह लल्ली के मुताबिक, भोपाल की सड़कों पर पहाड़ी और समतल हिस्सों के साथ कई ऐसे स्थान हैं, जहां सड़क की बनावट और तेज रफ्तार का मेल हादसों की आशंका बढ़ाता है। उनका कहना है कि वीआइपी रोड के संवेदनशील स्थानों पर गति सीमा के संकेतक और कैमरे लगाए जाएं। नियम तोड़ने वालों पर जुर्मानाि लगाया जाए तथा स्कूल-कॉलेज बसों में स्पीड गवर्नर की नियमित जांच हो। इसके अलावा कलेक्टर के निर्देश पर नगर निगम, लोक निर्माण विभाग को खतरनाक सड़कों का संयुक्त तकनीकी निरीक्षण करना चाहिए। जरूरत के अनुसार गति सीमा तय करने, स्पीड ब्रेकर और अन्य सुरक्षा इंतजाम करने से हादसों में कमी लाई जा सकती है।

हादसे का खौफः घटना को याद कर सिहर उठते हैं घायल

आरजीपीवी बस हादसे में गंभीर घायल छात्र अजय परमार को बुधवार को होश आ गया। वह खतरे से बाहर है। दो अन्य घायलों बसंत कुमार और खुशी गौड़ की हालत में भी सुधार है। हालांकि, खौफ विद्यार्थियों के मन में अब भी बना हुआ है। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी वह हादसे की याद से सिहर उठते हैं। मंगलवार को करबला के पास आरजीपीवी की बस पलटने से 11 छात्र-छात्राएं और कर्मचारी घायल हुए थे।

कंधे से ज्यादा खून बहने से बिगड़ी थी अजय की हालत

डॉक्टरों के अनुसार, अजय के दाहिने कंधे में गंभीर चोट लगने से काफी खून बह गया था। हादसे के सदमे और लगातार गिरते ब्लड प्रेशर के कारण स्थिति बिगड़ गई थी। बुधवार तड़के होश आने के बाद उसे आइसीयू से इमरजेंसी में शिफ्ट कर दिया गया। कंधे से रक्तस्त्राव रोकने ऑपरेशन किया जाएगा। बसंत के टूटे पैर का ऑपरेशन होगा। खुशी गौड़ के सिर के बाई ओर चोट लगी थी। डॉक्टरों के मुताबिक, सीटी स्कैन में बाहरी चोट का पता चला है। हादसे के सदमे से उबरने सुमित पवार अपने गांव बैतूल चले गए हैं। अनुष्का यादव और शिवम ने बताया, अब तेज रफ्तार वाहन देखकर डर लगने लगता है।

Updated on:
29 Oct 2026, 7:34 AM IST
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