भोपाल

Bhopal news: मोटापा दूर करने के लिए कमर और कूल्हे की होगी ट्रैकिंग, घर-घर जाएंगी आशा वर्कर

Situation of obesity: सरकारी अस्पतालों में अब मोटापे की पहचान के लिए सिर्फ BMI नहीं, बल्कि कमर और कूल्हे के अनुपात की भी जांच की जाएगी।
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Jul 30, 2026
Health news:पेट की चर्बी से पहचानेंगे डायबिटीज (Photo Source- freepik)
Health news:पेट की चर्बी से पहचानेंगे डायबिटीज (Photo Source- freepik)

Health news: मोटापे और गंभीर बीमारियों से निपटने के लिए अब देश के सरकारी अस्पतालों में केवल वजन और बीएमआइ नापने के बजाय कमर और कूल्हे के अनुपात की ट्रैकिंग होगी। इसका उद्देश्य सामान्य दिखने वाले लोगों में भी पेट की जानलेवा चर्बी (विसरल फैट) की समय रहते पहचान करना है। आइसीएमआर के अनुसार, अब हर पांच में से एक शहरी वयस्क पेट के मोटापे की चपेट में है।

लैसेट कमीशन की रिपोर्ट के अनुसार, एमपी के भोपाल शहर सहित देश के लोगों में वजन सामान्य होने पर भी जेनेटिक कारणों से पेट और कमर पर हानिकारक चर्बी जमा हो जाती है। बीएमआइ केवल ऊंचाई और कुल वजन मापता है, जिससे डायबिटीज, बीपी और हार्ट अटैक के असली खतरे वाले मरीज छूट जाते थे। अब स्वास्थ्य विभाग आशा कार्यकर्ताओं को मेज़रिंग टेप' और डिजिटल ट्रैकिंग लॉग से लैस करेगा। वे घर-घर जाकर लोगों को सही खान-पान, जंक फूड से दूरी और शारीरिक गतिविधि बढ़ाने के लिए प्रेरित करेंगी।

खतरनाक है पेट की चर्बी

विशेषज्ञों ने जानकारी दी कि विसरल फैट (पेट की अंदरूनी चर्बी) टाइप-2 डायबिटीज, शुरुआती हाइपरटेंशन, फैटी लिवर और दिल की बीमारियों का सबसे बड़ा कारण है।

एनएफएचएस-5 के अनुसार एमपी में मोटापे की स्थिति

  • 15-49 वर्ष की 22.2-26 प्रतिशत शहरी महिलाएं मोटापे से ग्रस्त हैं। इनमें से 24.9 प्रतिशत के पेट पर अधिक चर्बी है।
  • सुस्त जीवनशैली के कारण 15-49 वर्ष के 17.6-20 प्रतिशत पुरुष के पेट पर अधिक चर्बी हैं।
  • जंक फूड और स्क्रीन टाइम बढ़ने से 2-3.4 प्रतिशत बच्चे और किशोर मोटापे के शिकार हो रहे हैं।

मोटापे से बचने चीनी, जंक फूड और रिफाइंड कार्ब्स खाद्य पदार्थ छोड़ना होगा। आहार में प्रोटीन और फाइबर बढ़ाने के साथ रोजाना 30-45 मिनट व्यायाम करें, पर्याप्त नींद लें और रोज कम से कम 3-4 लीटर पानी पिएं। - डॉ. राकेश श्रीवास्तव, पूर्व सिविल सर्जन, जयप्रकाश जिला अस्पताल

ये होंगे स्वास्थ्य प्रभाव

शरी में पेट की चर्बी होने से मोटापा, इंसुलिन रेजिस्टेंस से टाइप-2 डायबिटीज, महिलाओं में पीसीओडी या बांझपन, सुस्त मेटाबॉलिज्म से हाइपोथायरायडिज्म और धमनियों में फैट जमने से हाई बीपी व दिल की बीमारियां बढ़ती है। साथ ही साथ फेफड़ों पर दबाव पड़ने से सांस लेने में दिक्कत भी हो सकती है।

Updated on:
30 Jul 2026 10:47 am
Published on:
30 Jul 2026 10:47 am