भोपाल

आठ किलो वजनी पत्थर में बांधकर जिंदा नवजात को डॉक्टर की लापरवाही से दी थी जलसमाधि

डेढ़ साल बाद केस दर्ज, दोषी डॉक्टर की खोज के लिए कमेटी...
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Jul 08, 2018
jal samadhi
आठ किलो वजनी पत्थर में बांधकर जिंदा नवजात को डॉक्टर की लापरवाही से दी थी जलसमाधि

भोपाल। राजधानी में डॉक्टर की लापरवाही से एक जिंदा बच्चे को जल समाधि दे दी गई। डेढ़ साल बाद जांच में खुलासा होने पर डॉक्टर के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

एसपी राहुल कुमार लोढ़ा ने बताया कि 22 दिसंबर 2016 को हरदा निवासी रवि लोनारे 24 ने पत्नी नीतू को प्रसव पीड़ा होने पर भोपाल के सुल्तानिया जनाना अस्पताल में भर्ती कराया गया था। नवजात को जन्म देने के बाद नीतू की मौत हो गई थी। डॉक्टर ने शिशु को भी मृत घोषित कर दिया था। डॉक्टर ने रिपोर्ट में लिखा था कि शिशु की गर्भ में ही मौत हो गई थी।

रवि ने नवजात को कपड़े में लपेटकर आठ किलो वजनी पत्थर में बांधकर छोटे तालाब में जलसमाधि दे दी। इधर पेंडिंग केस की जांच में पता चला है कि बच्चा जिंदा था। उसकी मौत पानी में डूबने से हुई थी। एसपी ने बताया कि 24 दिसंबर 2016 को पुलिस ने स्पोट्र्स क्लब के पास से बच्चे का शव बरामद किया था।

शरीर में लगी अस्पताल की चिट से पुलिस परिजन तक पहुंची। परिजनों ने बताया था कि डॉक्टर ने नवजात को मृत घोषित किया, इसलिए परंपरा अनुसार जलसमाधि दी। जहांगीराबाद पुलिस ने अज्ञात डॉक्टर के खिलाफ धारा-304ए में मामला दर्ज किया है। भोपाल कलेक्टर से डॉक्टर की पहचान के लिए मेडिकल विशेषज्ञों की कमेटी गठित करने की मांग की है।

ऐसे खुला लापरवाही का राज
एसपी ने हाल ही में पेंडिंग केस की जांच शुरू की थी। नवजात की पीएम रिपोर्ट और डायटम टेस्ट रिपोर्ट से पता चला कि मौत पानी में डूबने से हुई थी। उसकी फीमर बोन में पानी मिला था। मतलब, नवजात को जब तालाब में बहाया गया, तब वह जिंदा था।

दरअसल पेंडिंग केस की जांच में पता चला है कि बच्चा जिंदा था। उसकी मौत पानी में डूबने से हुई थी। एसपी ने बताया कि 24 दिसंबर 2016 को पुलिस ने स्पोट्र्स क्लब के पास से बच्चे का शव बरामद किया था।
शरीर में लगी अस्पताल की चिट से पुलिस परिजन तक पहुंची। परिजनों ने बताया था कि डॉक्टर ने नवजात को मृत घोषित किया, इसलिए परंपरा अनुसार जलसमाधि दी।

Published on:
08 Jul 2018 09:00 am