4 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

छोटी-छोटी बीमारियों तक का नहीं मिल रहा इलाज, मरीज परेशान

नवजात को नहीं मिला इलाज, नाराज परिजन चिकित्सकों को घटों तलाशते रहे...

2 min read
Google source verification
hospital

छोटी-छोटी बीमारियों तक का नहीं मिल रहा इलाज, मरीज परेशान

रायसेन. जिला अस्पताल का ढर्रा सुधरने की जगह बिगड़ता जा रहा है। मरीजों को न तो समय पर इलाज मिल रहा है और न ही दवाएं। छोटी-छोटी बीमारियों का इलाज के लिए मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है। 80 फीसदी पैरामेडिकल स्टाफ भी रोजाना भोपाल, विदिशा से आना जाना करता है।

जिला अस्पताल की चिकित्सा सेवाएं ऐसी स्थिति में भगवान भरोसे चल रही हैं। कुल मिलाकर जिला अस्पताल मरीजों के लिए प्रतिदिन रेफर सेंटर बनकर रह गया है। अब नवागत कलेक्टर एस प्रिया मिश्रा से लोगों व मरीजों ने अस्पताल की व्यवस्थाएं दुरुस्त करने की उम्मीद की है। डॉक्टरों व पैरा मेडिकल स्टाफ के अपडान पर शिकंजा कसने का भी आग्रह किया है।

आठ घंटे नहीं मिला इलाज
ग्राम सलैया तहसील सिलवानी निवासी किसान विजय सिंह यादव हाल निवास सरस्वती नगर सिलवानी अपनी बहू आरती यादव पत्नी पुष्पेंद्र सिंह यादव उम्र 23 वर्ष की दूसरी डिलेवरी कराने के लिए शुक्रवार रात आठ बजे जिला अस्पताल लेकर पहुंचा। रात साढ़े 9 बजे प्रसूता ने शिशु को जन्म दिया। रात करीब १२ बजे से आरती यादव के नवजात शिशु की तबीयत बिगडऩे लगी। उसे सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। साथ ही उसे झटके भी लग रहे थे।

उसे इलाज के लिए एसएनसीयू में भर्ती कराया गया है। रात 12 बजे से शनिवार सुबह 8.30 बजे तक एक भी बच्चा के डॉक्टर ने उसकी जांच नहीं की। तब परिजनों ने शनिवार को सुबह हंगामा खड़ा कर दिया। परिजन सुबह शिशुरोग चिकित्सक को घंटों ंतलाशते रहे। लेकिन भोपाल से आने वाले डॉ. दस बजे अस्पताल पहुंचे। डॉ. राकेश अहिरवार अहिरवार ने उस सीरियस नवजात का परीक्षण किया तो पता चला कि उसकी सांसें धीमी चल रही थीं। वह शरीरिक कमजोर भी है। इसीलिए उसे एसएनसीयू ऑक्सीजन लगाकर वार्मर मशीन पर रख गया। जिला अस्पताल में मरीजों को दवाओं का भी टोटा है। बच्चों को पीलिया की दवा नहीं मिल रही है।

अस्पताल में पदस्थ अधिकतर डॉक्टर भोपाल से अपडाउन करते हैं। जो कभी भी ओपीडी के समय आठ बजे अस्पताल नहीं पहुंचते हैं। तब तक गंभीर मरीज संकट के दौर से गुजरते हैं। कुछ समय ओपीडी में काटने के बाद डॉक्टर अपने उन ठिकानों पर जाकर बैठ जाते हैं, जहां से उनकी निजी प्रेक्टिस चलती है।

मामले को बारीकी से दिखवाती हूं। जिला अस्पताल के पैरामेडिकल स्टाफ समेत डॉक्टरों के अपडाउन प्रथा पर सख्ती से रोक लगाई जाएगी।
- षणमुख प्रिया मिश्रा, कलेक्टर