
भोपाल. नर्मदा किनारे दो जुलाई 2017 को एक साथ रोपे गए सवा सात करोड़ पौधों की जांच वन विभाग एक बार फिर कराएगा। पौधरोपण की यह छटवीं जांच होगी। इससे पहले वन मंत्री उमंग सिंघार ने जांच रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, तत्कालीन वन मंत्री गौरीशंकर शेजवार सहित वन मुख्यालय के अफसरों पर घपले के आरोप लगाए थे। उन्होंने इसकी जांच ईओडब्ल्यू से कराने की अनुशंसा भी की थी।
इस मामले में आइएफएस अफसरों को फंसता देख वन विभाग ने फाइल मुख्यमंत्री कमलनाथ को भेजी थी। इसके बाद उच्चस्तर पर तय हुआ है कि इस मामले की सूक्ष्म जांच कराई जाए। इसमें प्रदेश की सभी नर्सरियों के पौधे तैयार करने की क्षमता की जांच भी कराई जाए। इससे यह पता चलेगा कि जिससे पौधे बेचना बताया है, क्या वो सही है। इस बार जांच के लिए योजना एवं आर्थिक सांख्यिकी विभाग को नोडल एजेंसी बनाया गया है।
- विधानसभा में उठेगा मामला
योजना एवं आर्थिक सांख्यिकी विभाग ने वन, कृषि, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, उद्यानिकी विभाग से सात बिंदुओं पर जानकारी मांगी है। विभाग ने पूछा है कि पौधे कहां से खरीदे थे। किस मूल्य पर पौधे खरीदे गए। वन विभाग की नर्सरियों की क्षमता और उसमें पांच वर्षों तक तैयार किए गए पौधों की जानकारी भी मांगी है। यह भी पूछा है कि जिन क्षेत्रों में पौधे रोपे गए थे, उनकी भौगोलिक स्थिति क्या है। खसरा नंबर और मैप भी उपलब्ध कराएं। पौधों के जीवितता की जानकारी एक सप्ताह के अंदर मांगी है। इसकी रिपोर्ट को मंत्री समिति के समक्ष पेश की जाएगी।
- मंत्री समिति ने मांगी जानकारी
पौधरोपण की जांच के लिए विधानसभा में गठित चार सदस्यीय मंत्री समिति की बैठक 22 नवंबर को हुई थी। दूसरी बैठक 27 को होना था। लेकिन, पूरी जानकारी नहीं आने के कारण बैठक टाल दी गई है।
- ऐसे कराई जांच
पहली जांच : अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने अगस्त 2017 को याचिका दायर की थी। इसमें कहा था कि दो जुलाई 2017 को एक साथ रोपे गए सवा सात करोड़ पौधों की सुरक्षा के लिए कोई उपाय नहीं किए गए हैं। इस संबंध में एनजीटी ने सरकार से रिपोर्ट बुलाई। वन विभाग ने एनजीटी को बताया कि 95 फीसदी पौधे जीवित हैं।
दूसरी जांच : विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने सदन में सवाल उठाया था कि वाहवाही लूटने के चक्कर में बिना तैयारी के पौधे रोपे गए हैं। पौधरोपण की जांच कराई जाए। तब वन विभाग ने विधानसभा को बताया था कि 85 फीसदी पौधे जीवित हैं।
तीसरी जांच : कांग्रेस सरकार आने के बाद हुई इस जांच में अधिकारियों ने बताया कि 80 फीसदी पौधे जीवित हैं। बाद में पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने दावा किया कि उन्होंने पदयात्रा के दौरान देखा है कि ज्यादातर पौधे सूख गए हैं। कई जगह गड्ढे खोदे लेकिन पौधे नहीं लगाए गए। भाजपा सरकार ने फर्जी आंकड़े पेश किए थे।
चौथी जांच : वन मंत्री उमंग सिंघार ने जांच कराई तो पता चला कि 75 फीसदी से अधिक पौधे जीवित हैं। इसके बाद वे बैतूल सहित अन्य जिलों में औचक निरीक्षण करने गए। उन्होंने पाया कि 20 फीसदी पौधे ही जीवित हैं। जितने गड्ढे खोदे गए थे, उसमें से मात्र 15 फीसदी में ही पौधे रोपे गए।
पांचवी जांच : मंत्री सिंघार ने फिर जांच कराई। इसमें एक क्षेत्र के अधिकारी को दूसरे क्षेत्र में पौधरोपण की जांच का जिम्मा दिया गया। इसमें जांच में कुछ निजी एजेंसियों को भी शामिल किया गया था। हालांकि इस रिपोर्ट को उन्होंने बाहर नहीं किया। लेकिन, इसी के आधार पर 11 अक्टूबर 2019 जांच ईओडब्ल्यू को देने की घोषणा की थी। लेकिन, मामला ठंडे बस्ते में चला गया।