
MP Monsoon 2026 Update: एमपी में 5-6 दिन लेट हुआ मानसून, प्री मानसून की बारिश और पश्चिमी विक्षोभ से होने वाली बारिश देगी राहत। (फोटो सोर्स: freepik)
MP Monsoon Update: मध्य प्रदेश में मानसून का इंतजार बढ़ता जा रहा है। मानसून आगमन की सामान्य तारीख 15 जून है, लेकिन अभी मानसून छत्तीसगढ़, विदर्भ तक ही नहीं पहुंच पाया है। ऐसे में मौसम विशेषज्ञ मानसून की दस्तक की उम्मीद 20 जून के बाद ही बता रहे हैं। वैसे तो प्री-मानसून (Pre monsoon)की गतिविधियां चल रही है, लेकिन जून के लिहाज से सूबे में अब तक औसत से 37 फीसदी कम बारिश हुई है। मानसून में देरी के कारण फसलों की बुवाई प्रभावित हो सकती है।
उधर, गुरुवार को एक और पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय (New western Disturbance) होने की संभावना है। इसके चलते आगे प्री-मानसून एक्टिविटी बनी रहेगी। जून में प्रदेश में अब तक 41 मिमी बारिश होना चाहिए, जबकि 26.2 मिमी बारिश दर्ज की गई है। यह सामान्य से कम है। पूर्वी मध्य प्रदेश के मुकाबले पश्चिमी मध्यप्रदेश में ज्यादा बारिश हुई है, लेकिन वह भी सामान्य से कम ही है। आलीराजपुर में तो बारिश का खाता भी नहीं खुला है। बड़वानी में अब तक महज 2.3 तो देवास में 5.8, खरगोन में 5.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार मानसून की उत्तरी सीमा अभी हरनाई, सोलापुर, हैदराबाद, फूलबनी, मुजफ्फरपुर से होते हुए गुजर रही है। अगले 4 से 5 दिनों में तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड और बिहार के कुछ हिस्सों के साथ छत्तीसगढ़ में इसके बढ़ने की संभावना है। छत्तीसगढ़ और विदर्भ के बाद ही मध्यप्रदेश में मानसून की आमद होगी, ऐसे में अभी प्रदेश में मानसून के आने में समय लग सकता है। 20 जून के बाद मानसून कभी भी एंट्री कर सकता है।
राजधानी भोपाल में औसत से ज्यादा बारिश हो चुकी है। प्री-मानसून से शहर जमकर भीग रहा है। 1 जून से अब तक 98.6 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। यह सामान्य से 50.6 मिमी ज्यादा है। भोपाल में जून में बारिश का कोटा 132.4 मिमी है। इस लिहाज से 70 फीसदी से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।
मौसम विभाग के वैज्ञानिक डी. अरुण शर्मा ने बताया, प्रदेश में मौसम का मिजाज मिलाजुला रहने की संभावना है। गुरुवार से उत्तर भारत की ओर एक और पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकता है। इस कारण गरज-चमक की स्थिति बन सकती है। बादल, बौछारों की भी स्थिति रहेगी।
देश के कई हिस्सों में मानसून की रफ्तार धीमी पड़ती दिख रही है। विभिन्न उपग्रहों से प्राप्त आंकड़ों ने असमान वर्षा और संभावित अल नीनो प्रभाव को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
Updated on:
18 Jun 2026 09:09 am
Published on:
18 Jun 2026 09:08 am
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