
एक तरफ मध्य प्रदेश सरकार जहां महिलाओं के सम्मान और उत्थान के लिए लगातार योजनाएं और अभियान चला रही है तो वहीं दूसरी तरफ इसी राज्य की सरकार के सहयोगी कुछ संस्थान महिलाओं को अपमानित करने में नहीं हिचकिचा रहे हैं। इसकी ताजा बानगी सामने आई है मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में, जहां एक गर्भवती महिला को नौकरी से निकालने का मामला सामने आया है। फिलहाल मामला सामने आने के बाद प्रशासन की ओर से इसकी जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।
मामला राजधानी भोपाल के जय प्रकाश अस्पताल के वन स्टॉप सेंटर 'सखी' से जुड़ा है। यहां काम करने वाली एक महिला को संस्थान की ओर से सिर्फ इसलिए निकाल दिया गया कि वो गर्भवती है। महिला ने जब मातृत्व अवकाश लेने के लिए आवेदन दिया तो सेंटर संचालक ने उसे बाहर का रास्ता दिखा दिया।
वन स्टॉप सेंटर सखी डेस्क वर्कर थी महिला
शहर के रातीबड इलाके में रहने वाली रानी गढ़वाल पत्नी सोनू सूर्यवंशी मंगलवार को कलेक्टर की जनसुनवाई में पहुंचे थे। यहां उन्होंने गुहार लगाते हुए अपनी ओर से दिए आवेदन का जिक्र किया। महिला ने बताया कि वो जेपी अस्पताल में बने वन स्टॉप सेंटर सखी डेस्क वर्कर के पद पर काम करती थी, जिसे एक एनजीओ संचालित करता था।
ADM ने दिए जांच के आदेश
महिला ने बताया कि वो मई 2023 में गर्भवती हुई तो उसके साथ काम करने वाली दो महिलाओं का उसके प्रति व्यवहार बदल गया, उसने वन स्टॉप सेंटर संचालित करने वाली एनजीओ को मातृत्व अवकाश के लिए आवेदन दिया तो उन्होंने ना सिर्फ अवकाश देने से इंकार किया, बल्की उसे नौकरी से ही निकाल दिया। फिलहाल महिला की शिकायत सुनने के बाद एडीएम हरेंद्र नारायण ने मामले की जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।