भोपाल

आपका बच्चा भी जंक फूड – कोल्ड ड्रिंक्स का शौकीन है.. सावधान! भोपाल में तेजी से बढ़ रहे किडनी के मरीज

Kidney Stone : भोपाल में सामने आ रहे मामलों पर ही गौर करें तो यहां 9 - 10 साल के बच्चे भी अब बेहद तकलीप देने वाली समस्या की चपेट में आ रहे हैं।
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kidney stone patients
भोपाल में तेजी से बढ़ रहे किडनी स्टोन के मरीज (Photo Source- Patrika)

Kidney Stone Patients : किडनी स्टोन अब सिर्फ बड़ों की बीमारी नहीं रही। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सामने आ रहे मामलों पर ही गौर करें तो यहां 9 - 10 साल के बच्चे भी अब बेहद तकलीप देने वाली समस्या की चपेट में आ रहे हैं। पिछले कुछ साल में इसके केस तेजी से बढ़े हैं। हालात ये हैं कि, पथरी के 100 मरीजों में 10 बच्चे भी मिल रहे हैं। कई बच्चों में बड़ी पथरी होने से सर्जरी तक करनी पड़ रही है। विशेषज्ञ इसकी बड़ी वजह कम पानी पीना, जरूरत से ज्यादा नमक और जंक फूड के बढ़ते सेवन को बता रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि, बच्चों में कम पानी पीने और कोल्ड ड्रिंक्स, एरेटेड ड्रिंक्स और स्पोर्ट्स ड्रिंक्स पीने की प्रवृत्ति बढ़ी है। फ्रक्टोज और सोडियम शरीर में यूरिक एसिड और कैल्शियम का संतुलन बिगाड़ते हैं। इससे पेशाब गाढ़ा होता है और किडनी में क्रिस्टल बनने लगते हैं, जो आगे पथरी बन जाते हैं।

प्रोसेस्ड स्नैक्स और फास्ट फूड भी जिम्मेदार

वरिष्ठ नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. संजय गुप्ता के अनुसार, चिप्स, नमकीन, पैकेट वाले स्नैक्स, झटपट तैयार होने वाले इंस्टेंट फूड और फास्ट फूड बच्चों की किडनी पर असर डाल रहे हैं। इनमें नमक और प्रिजर्वेटिव अधिक होते हैं। इससे पेशाब में कैल्शियम की मात्रा बढ़ती है। लगातार ऐसी डाइट लेने से बच्चों में मेटाबॉलिक डिसऑर्डर का खतरा भी बढ़ रहा है। बच्चों में अधिकतर पथरी मेटाबॉलिक डिसऑर्ड के कारण हो रहे हैं।

केस नं-1

क्रिकेट खेलते समय- दर्द से बैठ गया आर्यन: अरेरा हिल के 10 साल का आर्यन रोज शाम क्रिकेट खेलता था। कुछ दिनों से वो खेलते-खेलते अचानक पेट पकड़कर बैठ जाता था। परिजन को लगा गर्मी या गैस के कारण हो रहा है। लेकिन, एक रात दर्द इतना बढ़ा कि उसे अस्पताल ले जाना पड़ा। जांच में किडनी में छोटी पथरी निकली। परिजन ने बताया कि, आर्यन पानी बहुत कम और कोल्ड ड्रिंक अधिक पीता है।

केस नं-2

स्कूल में बार-बार वॉशरूम जाने लगी सिया: शाहपुरा की 9 साल की सिया कुछ दिनों से स्कूल में बार-बार वॉशरूम जाने लगी थी। उसे पेशाब में जलन होती थी, लेकिन घर में बताने से संकोच करती थी। एक दिन उसके पेशाब में हल्का खून आया तो उसके मां-बाप अस्पताल ले गए। पेशाब की जांच की गई तो उसके यूरिनरी ट्रैक्ट में पथरी मिली।

केस नं-3

मोबाइल और चिप्स की आदत पड़ गई भारी: अयोध्या नगर का 9 साल के आबीर घंटों मोबाइल पर गेम खेलता है और बाहर खेलने बहुत कम जाता। पानी की जगह जूस और पैकेज्ड ड्रिंक ज्यादा लेता था। एक सुबह उसके कमर और पेट में तेज दर्द हुआ। उसके पिता अपेंडिक्स समझकर अस्पताल ले गए, लेकिन अल्ट्रासाउंड में किडनी में स्टोन निकली।

अब बिना बायोप्सी फैटी लिवर की पहचान संभव

शहर में तेजी से बढ़ती फैटी लिवर की पहचान अब दर्दनाक बायोप्सी जांच के बिना संभव हो सकती है। एम्स भोपाल के एमडी बायोकैमिस्ट्री छात्रा डॉ. दीपा रोशनी के शोध में एड्रोपिन और आइरिसिन, नामक दो बायोमार्कर को मेटाबोलिक- एसोसिएटेड फैटी लिवर डिजीज (एमएएफएलडी) की शुरुआती पहचान के लिए महत्वपूर्ण माना गया है। इस रोग का मोटापा, इंसुलिन रेजिस्टेंस, टाइप-2 डायबिटीज, हृदय रोग जोखिम और सक्रिय लिवर के नुकसान से गहरा संबंध है। इसकी प्रारंभिक पहचान और नियमित निगरानी अभी भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। उन्नत इमेजिंग तकनीकें महंगी होने के कारण सभी मरीजों तक आसानी से उपलब्ध नहीं हैं।

बच्चों में पथरी होने के कारण क्या होते हैं?

-शरीर में पानी की भारी कमी होना।
-पैकेज्ड ड्रिंक्स और ज्यादा नमक वाले जंक फूड का सेवन।
-प्यास लगने पर भी लंबे समय तक पानी नहीं पीना।
-परिवार में इस बीमारी का अनुवांशिक इतिहास होना।

बच्चों में पथरी के लक्षण क्या होते हैं?

-पेट या पीठ के निचले हिस्से में रुक-रुक कर दर्द होना।
-पेशाब के रंग में बदलाव होना या गहरा रंग आना।
-अचानक उल्टी होना या जी मिचलाना।
-पेशाब करते समय दर्द होना या पेशाब में खून आना।

बच्चों को पथरी से बचाने के उपाय?

-बच्चे को दिन भर में पर्याप्त मात्रा में पानी पिलाएं।
-पेशाब के रंग में बदलाव होने पर तुरंत ध्यान दें।
-भोजन में सफेद चीनी और नमक का स्तर कम रखें।
-अगर बच्चा बार-बार पेट दर्द की शिकायत करे तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें और जरूरी जांचें कराएं।

Updated on:
23 May 2026 07:00 am
Published on:
23 May 2026 07:00 am