AIIMS Bhopal- रेबीज का संक्रमण बढ़ा, उपचार के दौरान मौत: पांच मार्च को कुत्ते ने काटा था, नहीं कराया था इलाज
AIIMS Bhopal- एमपी में अजब वाकया हुआ। एक युवक भौंकने और गुर्राने लगा। उसे एम्स में भर्ती कराया गया जहां से उसने बिल्डिंग की पहली मंजिल से नीचे छलांग लगा दी। उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। एम्स के डॉक्टर्स ने बताया कि रेबीज का संक्रमण बढ़ने से युवक की हालत गंभीर हो गई थी। मार्च में उसे कुत्ते ने काटा था लेकिन उचित इलाज नहीं कराया था।
भोपाल एम्स के मेडिकल वार्ड में भर्ती रेबीज के एक मरीज ने शुक्रवार देर रात पहली मंजिल की खिड़की से छलांग लगा दी। जमीन पर गिरने के बाद उसके दोनों हाथ व पैर टूट गए थे। दोबारा भर्ती कराया गया। कुछ देर इलाज के बाद मौत हो गई। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि वह रेबीज की बीमारी से परेशान था। ऐसे में उसने परेशान होकर यह कदम उठाया।
बागसेवनिया थाना पुलिस के अनुसार कमल सिंह पिता बलराम सिंह (24) विदिशा जिले के इकोदिया गांव थाना नटेरन का रहने वाला था। बीते 5 मार्च को गांव में ही उसे मोहल्ले के एक आवारा कुत्ते ने काट लिया था। दाहिने हाथ में काटने पर थोड़ा खून निकला।
शुरुआती तौर पर तकलीफ नहीं होने पर युवक ने डॉक्टरों से उचित इलाज नहीं कराया। उसने एंटी रेबीज इंजेक्शन भी नहीं लगवाया। कुछ दिन बाद कमल सिंह की हालत बिगडऩे लगी। जब स्थानीय अस्पताल में दिखाया तो रेबीज संक्रमण फैलने का पता चला। रेबीज होने के कारण कमल सिंह की हरकतें भौंकने और गुर्राने जैसी होने लगी थीं। वह लार भी गिरा रहा था।
जब हालत ज्यादा बिगड़ गई, तो परिजन ने कमल सिंह को 30 अप्रेल को एम्स में भर्ती करा दिया। उसे मेडिकल वार्ड के आईसोलेशन वार्ड में रखा गया था। कमल सिंह गुरुवार-शुक्रवार रात पहली मंजिल से कूद गया था। डॉक्टरों के अथक प्रयास के बाद भी उसकी जान नहीं बच सकी।
बता दें कि डॉक्टरों का स्पष्ट मत है कि रेबीज के लक्षण दिखने के बाद इसका इलाज लगभग असंभव है। इसलिए जानवर के काटने या खरोंचने पर तुरंत एंटी-रेबीज टीका लगवाना ही एकमात्र बचाव है। रेबीज के लक्षण आमतौर पर जानवर के काटने के 2 से 8 सप्ताह बाद शुरू होते हैं, लेकिन ये 5 दिन से 1 वर्ष तक भी ले सकते हैं।