
Brahmani river flood Odisha: ओडिशा के केंद्रपाड़ा जिले में ब्राह्मणी नदी के बढ़ते जलस्तर और भीषण बाढ़ के कारण पिछले चार दिनों से फंसे आश्रम स्कूल के 248 छात्रों को बुधवार को सुरक्षित बचा लिया गया। ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल (ODRAF) की 25 सदस्यीय टीम ने तीन पावरबोट्स की मदद से एक बड़े रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम दिया।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ओडिशा के केंद्रपाड़ा जिले के कुलासाही इलाके में स्थित SC/ST छात्रों के आवासीय स्कूल में शनिवार से बाढ़ का पानी भरना शुरू हो गया था। लगातार जलस्तर बढ़ने और चारों तरफ पानी फैलने के कारण स्कूल में रहने वाले 248 छात्र कई दिनों तक वहीं फंसे रहे। स्थिति की जानकारी मिलने के बाद प्रशासन ने राहत और बचाव अभियान शुरू किया। केंद्रपाड़ा के जिलाधिकारी रघुराम अय्यर के मुताबिक, तेज बहाव के बीच तीन पावरबोट्स की मदद से सभी बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। रेस्क्यू के बाद छात्रों को पास के औल ब्लॉक स्थित दो अन्य आवासीय स्कूलों में भेज दिया गया, जहां उनके रहने की व्यवस्था की गई है।
पट्टामुंडई ब्लॉक शिक्षा अधिकारी अजीत कर ने बताया कि सभी बच्चों को सुरक्षित निकालने में कई घंटे लगे। बचाव दल ने पानी के तेज बहाव के बीच सावधानी से छात्रों को स्कूल से बाहर निकाला और उन्हें सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया। अधिकारियों के अनुसार, रेस्क्यू किए गए सभी बच्चों के लिए खाने-पीने की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। प्रशासन की ओर से उनकी जरूरतों का ध्यान रखा जा रहा है और फिलहाल सभी छात्र सुरक्षित हैं।
शनिवार सुबह से ब्राह्मणी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा, जिसके कारण स्कूल की पहली मंजिल पूरी तरह पानी में डूब गई। हालात बिगड़ते देख प्रधानाध्यापक सौमेंद्र दास ने सभी बच्चों को स्कूल की दूसरी मंजिल पर पहुंचा दिया, जहां उन्होंने कई दिनों तक सुरक्षित रहकर समय बिताया। स्कूल में करीब एक सप्ताह का राशन मौजूद था, इसलिए बच्चों के लिए खाने की व्यवस्था तो हो सकी, लेकिन अन्य जरूरी सुविधाओं की भारी कमी रही। रेस्क्यू किए गए एक छात्र ने बताया कि चार दिनों तक दैनिक जरूरतों को पूरा करना बेहद मुश्किल था। पीने के पानी, शौचालय और नहाने जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं। इसके अलावा, आसपास बाढ़ के पानी में जहरीले सांप भी तैरते दिखाई दे रहे थे, जिससे बच्चों में डर का माहौल बना रहा। वहीं, बच्चों के स्कूल में फंसे होने की खबर से उनके परिजन भी बेहद परेशान थे। पट्टामुंडई के रहने वाले संजय मन्ना ने बताया कि उनका 12 वर्षीय बेटा भी स्कूल में फंसा था और उसकी चिंता में वह पिछले दो दिनों से ठीक से सो नहीं पाए थे।
जिला प्रशासन के अधिकारियों ने स्वीकार किया कि शुरुआत में बच्चों को इमारत के भीतर सुरक्षित मानकर निकालने का फैसला टाल दिया गया था, लेकिन स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आखिरकार रेस्क्यू शुरू किया गया।