यूजीसी की रिपोर्ट के अनुसार कैंपस रैगिंग के मामलें में ओडिशा टॉप फाइव राज्यों में है...
(पत्रिका ब्यूरो,भुवनेश्वर): रैगिंग के लिए बदनाम ओडिशा के कालेजों के उन स्टूडेंट्स को अब सरकार बर्दाश्त नहीं करेगी, जो रैगिंग करने में माहिर होते हैं। राज्य सरकार ने सभी कॉलेजों और यूनिवर्सिटियों को आदेश जारी किया है कि रैगिंग करने वाले स्टूडेंट्स को निकाल बाहर करें। कैंपस रैगिंग किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यूजीसी की रिपोर्ट के अनुसार कैंपस रैगिंग के मामलें में ओडिशा टॉप फाइव राज्यों में है।
यूजीसी की रिपोर्ट आते ही सरकार ने शैक्षिक संस्थानों को निर्देश जारी करते हुए कहा कि कैंपस रैगिंग करने वाले स्टूडेंट्स को फौरन कैंपस से बाहर निकाला जाए। उच्च शिक्षा मंत्री अनंत दास ने कहा कि विभागीय सचिव ने राज्य के सभी शिक्षण संस्थानों को सरकुलर जारी करके साफ कह दिया है कि रैगिंग करने वालों को निकाल बाहर करें।
दास ने कहा कि जूनियरों से रैगिंग करने वाले छात्रों को दुष्परिणाम भुगतने होंगे। ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यूजीसी की रिपोर्ट में टॉप फाइव राज्यों में ओडिशा चौथे नंबर पर है। मानव संसाधन मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार 2013 से 2017 तक 207 मामले रैगिंग के सिर्फ ओडिशा से आए हैं। सबसे ज्यादा मामले बीजू पटनायक यूनिवर्सिटी आफ टेक्नोलाजी के हैं।
बता दें कि कॉलेज में सीनियर व फ्रेशर स्टूडेंट के बीच अच्छे संबंध बने इसलिए पहले से ही कॉलेजों में रैंगिंग का सिस्टम रखा गया था। यह एक परंपरा की तरह था जिसका गलत फायदा उठाया जाने लगा। मधुर संबंध बनाने के बजाय सीनियर स्टूडेंट जूनीयर्स को प्रताड़ित करने लगे उनकी खिंचाई करने लगे। रैगिंग से पेरशान होकर कई छात्र छात्राओं की मौत की खबरें भी सामने आती रही हैं। ऐसे में रैगिंग के कारण हो रहे अपराधों को रोकने व अपनी छवि को सुधारने के लिए सरकार की ओर से यह कदम उठाया गया है।