बीजापुर

बाघ शिकार मामले में बड़ी कार्रवाई, इंद्रावती टाइगर रिजर्व के 3 वनकर्मी निलंबित, जांच जारी

Bijapur Tiger Hunting Case: इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघ शिकार प्रकरण को लेकर वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। मामले में लापरवाही पाए जाने पर पासेवाड़ा रेंज के रेंजर, डिप्टी रेंजर और बिट गार्ड को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
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Jul 09, 2026
Indravati Tiger Reserve News
इंद्रावती टाइगर रिजर्व (फोटो सोर्स- पत्रिका)

Chhattisgarh Suspended News: बीजापुर जिले के इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघ शिकार प्रकरण को लेकर बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। मामले में लापरवाही पाए जाने पर पासेवाड़ा रेंज के रेंजर, डिप्टी रेंजर और बिट गार्ड को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। वन विभाग ने बताया कि बाघ शिकार मामले में प्रथम दृष्टया लापरवाही सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई है। वहीं, पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच जारी है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई भी की जाएगी।

इंद्रावती टाइगर रिजर्व के 3 वनकर्मी निलंबित

शासन के निर्देश पर पासेवाड़ा रेंज के रेंजर कमल कश्यप, डिप्टी रेंजर नरहरि बघेल और बीट गार्ड विश्वनाथ मांझी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। तीनों पर अपने कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही बरतने का आरोप है। एसडीओ मनोज बघेल ने बताया कि बाघ शिकार की घटना सामने आने के बाद वन विभाग और वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू की थी। प्रारंभिक जांच में संबंधित अधिकारियों की भूमिका और लापरवाही के संकेत मिलने पर शासन ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए तीनों कर्मचारियों के निलंबन के आदेश जारी किए।

जांच जारी

उन्होंने कहा कि मामले की विस्तृत जांच अभी जारी है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच के दौरान किसी अन्य अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता अथवा लापरवाही सामने आती है, तो उसके विरुद्ध भी नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

क्या कहते हैं वन्यजीव अपराध के आंकड़े?

छत्तीसगढ़ में वन्यजीवों के शिकार और तस्करी के मामलों के आंकड़े भी चिंता बढ़ाने वाले हैं-

  • वर्ष 2024 में ऐसे 17 मामलों में 66 लोगों को गिरफ्तार किया था।
  • वर्ष 2025 में 22 मामलों में 73 गिरफ्तारियां हुईं।
  • 2026 में 30 जून तक 12 मामलों में 43 लोगों को पकड़ा जा चुका है।
  • सिर्फ जून 2026 में दंतेवाड़ा, कांकेर और बीजापुर में छह बाघों के शिकार के मामले सामने आए, जबकि चार बाघों की खाल भी बरामद की गई।

वन्यजीव अपराधों में सजा दिलाना अब भी बड़ी चुनौती

वन विभाग के लिए केवल आरोपियों की गिरफ्तारी ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि अदालत में उनके खिलाफ ठोस साक्ष्य प्रस्तुत कर दोषसिद्धि सुनिश्चित करना सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की एक अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार, वन्यजीव अपराधों से जुड़े 90 प्रतिशत से अधिक मामलों में आरोपी अदालत से बरी हो जाते हैं। इसकी प्रमुख वजह जांच के दौरान तकनीकी और कानूनी रूप से मजबूत साक्ष्य एकत्र नहीं हो पाना तथा सबूतों की कड़ी कमजोर पड़ जाना है। ऐसे में कई मामलों में आरोपियों को संदेह का लाभ मिल जाता है, जिससे दोषियों को सजा दिलाने में वन विभाग को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

Updated on:
09 Jul 2026 05:01 pm
Published on:
09 Jul 2026 03:31 pm