
गांव के युवा बने जंगल के वैज्ञानिक (Photo AI)
Chhattisgarh Forest News: बीजापुर के इंद्रावती टाइगर रिजर्व में अब जंगल की पगडंडियों पर सिर्फ वनकर्मी नहीं, बल्कि गांवों के प्रशिक्षित युवा भी वनभैंसों की "कुंडली" तैयार कर रहे हैं। करीब चार दशक बाद पहली बार जंगली भैंसों की संख्या, गतिविधियों, रहने का तरीका और आनुवंशिक शुद्धता का व्यवस्थित वैज्ञानिक दस्तावेज तैयार किया जा रहा है। खास बात यह है कि इस संरक्षण अभियान में स्थानीय युवाओं को एआई आधारित तकनीक, जीपीएस सर्वेक्षण और कैमरा ट्रैप संचालन का प्रशिक्षण देकर "वन भैंसा मित्र" बनाया गया है। मध्य भारत में वन भैंस (बुबालस अर्नी) की अंतिम प्राकृतिक आबादी का प्रमुख आश्रय इंद्रावती टाइगर रिजर्व को माना जाता है। वर्तमान में यहां 10 से 15 वन भैंसों की मौजूदगी का अनुमान है।
वन मंत्री केदार कश्यप के नेतृत्व और मुख्य प्रधान वन संरक्षक अरुण पांडे के मार्गदर्शन में शुरू इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि जंगल से सटे गांवों के शिक्षित युवाओं को संरक्षण का साझेदार बनाया गया है। छह महीने के विशेष प्रशिक्षण के बाद ये युवा वन भैंसों की ट्रैकिंग, व्यवहार अध्ययन, फोटो डॉक्यूमेंटेशन और डेटा संग्रहण का काम कर रहे हैं।
अभियान का सबसे रोचक और महत्वपूर्ण हिस्सा आनुवंशिक अध्ययन है। सीसीएमबी हैदराबाद के सहयोग से वनभैंसों के गोबर और अन्य जैविक नमूने एकत्र किए जा रहे हैं। इन नमूनों से यह पता लगाया जाएगा कि इंद्रावती की वनभैंस आबादी आनुवंशिक रूप से कितनी शुद्ध है, उसमें विविधता कितनी बची है।
बीजापुर लंबे समय तक नक्सलवाद के कारण राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहा, लेकिन अब वही क्षेत्र जैव विविधता संरक्षण के एक नए मॉडल के रूप में उभर रहा है। नोवा नेचर वेलफेयर सोसायटी, वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन ट्रस्ट (डब्ल्यूसीटी), इंद्रावती टाइगर रिजर्व प्रबंधन और सीसीएमबी के संयुक्त प्रयास से वर्ष 2025 में शुरू हुए "वन भैंसा मित्र" कार्यक्रम से अब तक 20 से अधिक स्थानीय युवा सीधे जुड़े हैं।
परियोजना से जुड़े विशेषज्ञों का दावा है कि स्थानीय युवाओं की मदद से वन भैंसों की संख्या, वितरण क्षेत्र, गतिविधियों और आवास उपयोग से जुड़ी ऐसी जानकारियां मिल रही हैं, जो पिछले लगभग 40 वर्षों में व्यवस्थित रूप से उपलब्ध नहीं थीं। इंद्रावती टाइगर रिजर्व की फील्ड डायरेक्टर स्टाइलों मंडावी के अनुसार यह डेटा भविष्य में संरक्षण नीति और प्रबंधन निर्णयों का आधार बनेगा।
नोवा नेचर वेलफेयर सोसायटी के सचिव मोईज अहमद के नेतृत्व में फील्ड इंचार्ज एवं संस्था के वैज्ञानिक डॉ. आलोक कुमार साहू तथा भूपेंद्र जगत द्वारा जंगली भैंसों के आवास क्षेत्रों में सर्वेक्षण कार्य और टाइगर रिजर्व से लगे गांवों में जनजागरुकता अभियान संचालित किए जा रहे हैं।
Updated on:
22 Jun 2026 10:02 am
Published on:
22 Jun 2026 10:02 am
