बिजनोर

’14 साल का लंबा इंतजार, आखिरकार मिला न्याय!’ बिजनौर के प्रबल अग्रवाल हत्याकांड में सात दोषियों को उम्रकैद

Bijnor Crime News: बिजनौर के बहुचचित प्रबल अग्रवाल हत्याकांड के मामले में 14 साल बाद कोर्ट ने फैसला सुना दिया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय एवं फास्ट ट्रैक कोर्ट-दो के न्यायाधीश शहजाद अली ने सात आरोपियों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है।
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Jul 31, 2026
Bijnor Prabal Agarwal Murder Case
बिजनौर के प्रबल अग्रवाल हत्याकांड में सात दोषियों को उम्रकैद

Bijnor Prabal Agarwal Murder Case: बिजनौर में एक पुराना हत्याकांड आखिरकार खत्म हुआ। 18 साल के प्रबल अग्रवाल की हत्या के मामले में शुक्रवार को फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सात लोगों को उम्रकैद की सजा सुना दी। इनमें कारोबारी बाप-बेटा भी शामिल हैं। हर दोषी पर एक-एक लाख रुपये जुर्माना भी लगाया गया है। प्रबल की बहन प्राची ने 14 साल तक अदालत का चक्कर काटा और आखिरकार न्याय मिल ही गया।

जानें पूरा मामला

यह घटना 19 दिसंबर 2012 की है। बिजनौर शहर कोतवाली क्षेत्र के शहनाई बैंक्वेट हॉल में महाराजा अग्रसेन जयंती का कार्यक्रम चल रहा था। प्रबल भी वहां पहुंचा था। आरोप है कि उसने रामलीला कमेटी के तत्कालीन अध्यक्ष संजय अग्रवाल की बेटी से बात की। संजय अग्रवाल उस समय नशे में थे। बात बढ़ गई और संजय, विनय अग्रवाल समेत कुछ लोगों ने प्रबल को बुरी तरह पीटना शुरू कर दिया। इतनी मार पड़ी कि प्रबल की मौत हो गई। आरोपियों ने शव को कार में डालकर करीब 10 किलोमीटर दूर गंगा नदी में फेंक दिया।

27 दिन बाद गंगा किनारे मिला शव

प्रबल के पिता आलोक अग्रवाल ने बेटे के गायब होने की रिपोर्ट लिखवाई। परिवार ने बहुत खोजबीन की, प्रदर्शन भी किए। करीब 27 दिन बाद 15 जनवरी 2013 को गंगा किनारे शव मिला। पोस्टमार्टम में मारपीट से मौत की पुष्टि हुई। पुलिस ने हत्या, अपहरण और सबूत मिटाने के आरोप लगाए।

सदमे में टूट गया परिवार

इस सदमे ने परिवार को तोड़ दिया। छह महीने बाद पिता का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। कुछ समय बाद मां भी चल बसीं। घर में अकेली बहन प्राची रह गईं। उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। वकील मोहम्मद जकावत की मदद से 14 साल तक लड़ाई लड़ी। 305 तारीखें पड़ीं, 17 गवाहों के बयान हुए।

जुर्माने की 90 फीसदी रकम प्राची को देने का आदेश

अदालत ने जुर्माने की 90 फीसदी रकम प्राची को देने का आदेश दिया है। फैसला सुनते ही प्राची की आंखें भर आईं। उन्होंने कहा कि बहुत लंबे इंतजार के बाद न्याय मिला है, लेकिन फांसी की सजा होती तो और अच्छा लगता। अपर जिला शासकीय अधिवक्ता अजीत पवार ने कहा कि मामला बहुत गंभीर था। माता-पिता सदमे में चले गए, लेकिन बहन ने लड़ाई नहीं छोड़ी। यह फैसला पीड़ित परिवार के लिए बड़ी राहत है।

Updated on:
31 Jul 2026 05:42 pm
Published on:
31 Jul 2026 05:41 pm