
वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की मार अब विश्वविद्यालय और कॉलेज छात्रों पर भी पड़ सकती है। केन्द्र सरकार ने परीक्षा और प्रवेश शुल्क पर 18 फीसदी शुल्क लगाने के प्रस्ताव पारित किए हैं। हालांकि इस संबंध में अभी तक अधिसूचना जारी नहीं हुई है, लेकिन शिक्षाविदों का मानना है कि जल्द ही इस संबंध में सरकार अधिसूचना जारी कर सकती है।
अगर प्रवेश और परीक्षा शुल्क पर 18 फीसदी जीएसटी लागू होती है तो मध्यम वर्ग के लाखों छात्रों को फीस बढ़ोतरी का सामना करना पड़ सकता है। सरकार की इस योजना के बाद बीकानेर सहित प्रदेश के अन्य कॉलेज और विश्वविद्यालय छात्र संगठनों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया है। उनका तर्क है कि जीएसटी वस्तु की खरीद और बिक्री पर लागू होना चाहिए, न कि शिक्षा पर। सरकार शिक्षा को वस्तु मान रही है जो गलत है।
जीएसटी से अतिरिक्त भार आएगा
शिक्षाविद प्रो. राजेन्द्र पुरोहित का मानना है कि कॉलेजों में किसानों व गांवों के बच्चे आते है। जीएसटी लगाने से यह बच्चे शिक्षा से वंचित रह जाएंगे। एक तरफ सरकार स्कॉलरशिप देने की बात कर रही है तो दूसरी तरफ जीएसटी लगा रहे है।
लाखों छात्र होंगे प्रभावित
फीस पर जीएसटी लागू होने से प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों पर इसका असर पड़ेगा। अकेले बीकानेर के महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय में प्रति वर्ष करीब साढ़े तीन लाख विद्यार्थियों को जीएसटी का दंश झेलना पड़ सकता है। इसके साथ-साथ मेडिकल, इंजीनियरिंग, वेटरनरी सहित विभिन्न कॉलेज और विश्वविद्यालय में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को फीस के साथ जीएसटी चुकानी होगी। बीकानेर संभाग में जीएसटी से प्रभावित होने वाले विद्यार्थियों का अनुमानित आंकड़ा करीब पांच लाख माना जा रहा है।
क्या बोले छात्र संघ अध्यक्ष
राजकीय डूंगर महाविद्यालय के छात्र संघ अध्यक्ष अशोक बुडि़या ने बताया कि शिक्षा जगत में जीएसटी लगाना न केवल गलत है, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को शिक्षा से दूर करने जैसा प्रावधान है। सरकार की जिम्मेदारी है कि वह शैक्षणिक स्तर में लगातार सुधार करे, इसके लिए वह अन्य माध्यमों से इसके सोर्स डवलप करें।
अभी जारी नहीं हुई अधिसूचना
महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक डॉ. जसवंत खीचड़ ने बताया कि इस संबंध में अभी तक कोई अधिसूचना नहीं मिली है। ऐसे मेंं कुछ कहना जल्दबाजी होगी। फीस पर जीएसटी प्रभावी होती है तो वह फीस के साथ ही वसूली जाएगी। विश्वविद्यालय से करीब साढ़े तीन लाख विद्यार्थी जुड़े हुए हैं।