
बीकानेर. 63 साल पहले निर्मित इन्दिरा गांधी नहर कई स्थानों पर जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच चुकी है। इसमें पूरी क्षमता से पानी चलाने पर क्षतिग्रस्त होने का खतरा बना रहता है। साथ ही नहर से पानी का रिसाव भी साल दर साल बढ़ता जा रहा है। ऐसे में नहर की मरम्मत और फीडर की रिलाइनिंग कराने के लिए 26 मार्च से 65 दिन की नहरबंदी प्रस्तावित है। इसमें 30 दिन आंशिक नहरबंदी रखी जाएगी और बाद में 35 दिन पूर्ण नहरबंदी रहेगी। चुनावी साल में पेयजल पर निर्भर प्रदेश के दस जिलों में पेयजल संकट भारी पड़ सकता है। इसे लेकर चिंतित सरकार पंजाब से पूर्ण नहरबंदी के पांच दिन कम कराने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
राज्य सरकार ने वर्ष 2019 में पंजाब सरकार, केन्द्र सरकार से हुए समझौते के तहत आइजीएनपी का जीर्णोद्धार कराने का निर्णय लिया था। बीते दो सालों में चरणबद्ध रूप से इन्दिरा गांधी फीडर एवं नहर की रिलाईनिंग एवं मरम्मत का कार्य दो-दो महीने की बंदी लेकर किया गया है।
इस बार नहरबंदी 25 मार्च से 29 मई तक की अधिसूचना पंजाब सरकार ने जारी की है। इसमें प्रथम 30 दिवस यानी 25 मार्च से 24 अप्रेल तक आंशिक नहरबंदी रहेगी। इसमें पेयजल आवश्यकता के लिए नहर में थोड़ा पानी चलता रहेगा। सिंचाई के लिए पानी नहीं दिया जाएगा। इसके बाद 25 अप्रेल से 29 मई तक पूर्णनहर बंदी में पानी का प्रवाह शून्य हो जाएगा। नहर में पेयजल आपूर्ति नहीं हो सकेगी।
अधिकतम 25 दिन का भंडारण
जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के पिछले सालों के नहरबंदी के अनुभव के अनुसार भंडारित किया पानी अधिकतम 25 दिन ही पेयजल आवश्यकताओं को पूरा कर पाता है। इसमें भी पहले एक दिन के अंतराल से फिर दो दिन के अंतराल से पेयजल आपूर्ति करनी पड़ती है। अंतिम दस दिन इस बार भी भारी पड़ सकते है। ऐसे में प्रयास किया जा रहा है कि पूर्ण नहरबंदी के 35 से घटाकर 30 दिन करवा ली जाए। नहरबंदी के बाद पानी छोड़ने पर भी पंजाब से यहां तक पहुंचने में समय लगता है।
दस क्रॉस रेगुलेटर्स में होगा पानी भंडारण
जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग सभी जलाशयों एवं डिग्गियों को पूर्ण रूप से भरवा कर रखेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में काश्तकारों की डिग्गियों को भी भरवाने का कार्य किया जाएगा। मुख्य नहर में भी 10 स्थानों पर क्रॉस रेग्यूलेटर्स पर पानी का भण्डारण किया जाएगा। सिंचाई बारी समाप्त हो जाने पर इन्दिरा गांधी नहर परियोजना की शाखाओं, वितरिकाओं में भी यथासंभव पानी का भण्डारण करने की व्यवस्था की जाएगी।
भीषण गर्मी और पेयजल संकट
मार्च के अंत तक पश्चिम राजस्थान में गर्मी भीषण रूप धारण कर लेती है। इसी समय नहरबंदी शुरू होती है। ऐसे में पानी की लागत बढ़ जाती है और खुले जलाश्याें और नहरों में पानी के वाष्पीकरण से छीजत बढ़ जाती है। पेयजल संकट से पहले मवेशियों के लिए पानी का संकट खड़ा होता है। बेहसहारा घूमते पशु और मरुस्थलीय वन्यजीवों का जीवन संकट में पड़ जाता है। अप्रेल में हालात ज्यादा खराब हो जाते है।