बीकानेर

मोबाइल की गिरफ्त में बचपन, मैदान छूटे… स्क्रीन बन गई दुनिया, रील्स, गेम्स और गैजेट्स में उलझ रही नई पीढ़ी

ऑनलाइन पढ़ाई के दौर में शुरू हुई स्क्रीन की आदत अब नई जनरेशन के लिए लत बनती जा रही है। रील्स, गेम्स और सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल ने बच्चों को न केवल खेलकूद से दूर किया है, बल्कि उनकी आंखों, मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक व्यवहार पर भी गंभीर असर डालना शुरू कर दिया है।

2 min read
May 30, 2026
घर में ग्रुप बनाकर मोबाइल गेम खेलते बच्चे।

कभी गिल्ली-डंडा, कबड्डी और पकड़म-पकड़ाई से गुलजार रहने वाले मोहल्लों का बचपन अब मोबाइल स्क्रीन में कैद होता जा रहा है। ऑनलाइन पढ़ाई के दौर में शुरू हुई स्क्रीन की आदत अब नई जनरेशन के लिए लत बनती जा रही है। रील्स, गेम्स और सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल ने बच्चों को न केवल खेलकूद से दूर किया है, बल्कि उनकी आंखों, मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक व्यवहार पर भी गंभीर असर डालना शुरू कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि मोबाइल की लत केवल बच्चों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इससे पारिवारिक रिश्तों में भी दूरी बढ़ रही है। लगातार स्क्रीन देखने से बच्चों में चिड़चिड़ापन, एकाग्रता में कमी, याददाश्त कमजोर होना और नींद की समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।

मैदान खाली, मोबाइल फुल
शारीरिक शिक्षक गणेश हर्ष के अनुसार मोबाइल गेम्स और ऑनलाइन गतिविधियों के कारण बच्चे आउटडोर खेलों से दूर हो रहे हैं। इसका सीधा असर उनके शारीरिक और मानसिक विकास पर पड़ रहा है। पहले जहां बच्चे घंटों मैदानों में खेलते थे, वहीं अब अधिकांश समय मोबाइल स्क्रीन पर बीत रहा है।

आंखों पर सबसे ज्यादा मार
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल चौहान के अनुसार मोबाइल, लैपटॉप और टीवी का अत्यधिक उपयोग बच्चों की आंखों के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। लगातार स्क्रीन देखने से आंखों में जलन, सिरदर्द, धुंधला दिखना और कंप्यूटर विजन सिंड्रोम जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। उन्होंने सलाह दी कि बच्चों को पर्याप्त रोशनी में पढ़ाई करनी चाहिए, स्क्रीन से उचित दूरी रखनी चाहिए और कम से कम आठ घंटे की नींद लेनी चाहिए।

पीबीएम में बढ़ रहे मरीज
पीबीएम अस्पताल के नेत्र रोग विभाग में प्रतिदिन 60 से 70 बच्चे और किशोर आंखों से जुड़ी समस्याओं को लेकर पहुंच रहे हैं। इनमें से 35 से 40 बच्चे आंखों की विभिन्न बीमारियों से प्रभावित पाए जा रहे हैं। ज्यादातर मरीज 7 से 16 वर्ष आयु वर्ग के हैं।

कभी ये होते थे बच्चों के पसंदीदा खेल
-गिल्ली-डंडा

  • सतोळियो
  • लुक-मिचनी
  • लोह-लकड़
  • चरभर
  • खो-खो
  • कबड्डी
  • रस्सी कूदना
  • पकड़म-पकड़ाई
  • ऊंच-नीच का पापड़

सर्वे में सामने आए चिंताजनक आंकड़े
2024 के सर्वे में 5 से 16 वर्ष के 60% बच्चों में डिजिटल एडिक्शन के लक्षण
85% अभिभावकों ने स्क्रीन टाइम नियंत्रित करने में परेशानी बताई
70-80% बच्चे तय सीमा से अधिक मोबाइल उपयोग कर रहे
पुणे सर्वे में 37% लोगों में ‘ड्राई आई’ और कंप्यूटर विजन सिंड्रोम के लक्षण
सीबीएसई अध्ययन में 74% छात्र तय सीमा से अधिक स्क्रीन उपयोग करते मिले
21% बच्चे प्रतिदिन 4 घंटे से ज्यादा मोबाइल और सोशल मीडिया पर सक्रिय

बच्चों को स्क्रीन एडिक्शन से बचाने के उपाय
स्क्रीन टाइम तय करें
मोबाइल की जगह आउटडोर खेलों को बढ़ावा दें
परिवार के साथ समय बिताने की आदत डालें
सोने से पहले मोबाइल उपयोग बंद करें
पढ़ाई और मनोरंजन का संतुलन बनाए रखें
बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखें

Published on:
30 May 2026 08:48 pm
Also Read
View All