
Malvi Camel : एनआरसीसी में बाड़े में विचरण करते मालवी नस्ल के ऊंट। फोटो पत्रिका
Rajasthan : देश की 9 मान्यता प्राप्त ऊंट नस्लों में शामिल मालवी (सफेद) ऊंट अब अस्तित्व के सबसे बड़े संकट से गुजर रहा है। लगातार घटती संख्या के कारण यह नस्ल विलुप्ति के कगार पर पहुंच गई है। यदि समय रहते संरक्षण के ठोस प्रयास नहीं किए गए, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए मालवी ऊंट केवल किताबों में दर्ज इतिहास बनकर रह जाएगा। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र (एनआरसीसी), बीकानेर ने इसके संरक्षण और संवर्धन की पहल शुरू की है।
एनआरसीसी के सर्वे में सामने आया कि मालवी नस्ल के ऊंटों की संख्या बेहद कम रह गई है। पशुधन गणना-2019 के अनुसार देशभर में इस नस्ल के केवल 102 ऊंट ही मौजूद हैं। घटती संख्या को देखते हुए संस्थान ने इसके संरक्षण एवं संवर्धन के लिए विशेष पहल शुरू की है। इसके तहत एनआरसीसी ने 12 मालवी ऊंट खरीदे हैं, जिनमें तीन नर और नौ मादा ऊंट शामिल हैं। इन ऊंटों के माध्यम से शुद्ध प्रजनन कार्यक्रम चलाकर नस्ल की संख्या बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
मालवी नस्ल के ऊंट मुख्य रूप से राजस्थान के कोटा, बूंदी, झालावाड़ और बारां जिलों के अलावा मध्यप्रदेश के मंदसौर, नीमच, रतलाम और ग्वालियर क्षेत्रों में पाए जाते हैं। इनकी पहचान सफेद रंग और अपेक्षाकृत छोटा कद है। मादा मालवी ऊंट एक बार में करीब चार से पांच किलो तक दूध देने की क्षमता रखती है।
वैज्ञानिकों के अनुसार किसी भी ऊंट नस्ल में मादा ऊंटों की संख्या 300 से कम हो जाने पर उसे संकटग्रस्त और लुप्तप्राय श्रेणी में माना जाता है। ऐसी स्थिति में वैज्ञानिक संरक्षण, प्रजनन और आनुवंशिक संसाधनों को बचाने के प्रयास शुरू किए जाते हैं।
गौरतलब है कि भारत में ऊंटों की 9 नस्लों को मान्यता मिली हुई है। इनमें बीकानेरी, जैसलमेरी, कच्छी, मेवाड़ी, जालौरी, मेवाती, मालवी, मारवाड़ी और खराई नस्ल शामिल हैं।
एनआरसीसी ने मालवी ऊंट के संरक्षण के लिए फार्म आधारित प्रजनन समूह स्थापित किया है। इसके माध्यम से शुद्ध नस्ल के प्रजनन, वैज्ञानिक संरक्षण और भविष्य के लिए इस दुर्लभ आनुवंशिक संपदा को सुरक्षित रखने का कार्य किया जाएगा। डॉ. अनिल कुमार पूनिया, निदेशक, एनआरसीसी ने बताया कि मालवी ऊंट नस्ल के संरक्षण और संवर्धन के लिए संस्थान ने पहल की है। प्रजनन कार्यक्रम के माध्यम से इस संकटग्रस्त नस्ल को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।
संरक्षण अभियान सफल रहा, तो आने वाले वर्षों में मालवी ऊंटों की संख्या बढ़ाने के साथ इस अनमोल आनुवंशिक विरासत को सुरक्षित रखा जा सकेगा।
डॉ. वेदप्रकाश, प्रधान वैज्ञानिक, एनआरसीसी
Updated on:
25 Jul 2026 01:07 pm
Published on:
25 Jul 2026 01:05 pm
