भीषण गर्मी के बीच आज दोपहर एक चलती इलेक्ट्रिक स्कूटी में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते स्कूटी आग के गोले में तब्दील हो गई, जिससे मौके पर हड़कंप मच गया।
भीषण गर्मी के बीच आज दोपहर एक इलेक्ट्रिक स्कूटी में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते स्कूटी आग के गोले में तब्दील हो गई, जिससे मौके पर हड़कंप मच गया। गनीमत रही कि स्कूटी सवार ने समय रहते धुआं देख लिया और वाहन से कूदकर अपनी जान बचाई। मामला बीकानेर के व्यस्ततम रोशनी घर चौराहे के सामने का है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार स्कूटी सवार रोशनी घर चौराहे से गुजर रहा था, तभी वाहन के निचले हिस्से से तेज धुआं निकलने लगा। चालक ने तुरंत स्कूटी रोकी और उससे दूर भाग गया। कुछ ही सेकंड में स्कूटी से ऊंची लपटें उठने लगीं। बीच सड़क पर वाहन को जलता देख यातायात बाधित हो गया और आसपास के दुकानदार व राहगीर मदद के लिए दौड़े। स्थानीय लोगों ने कड़ी मशक्कत के बाद पानी और मिट्टी डालकर आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक स्कूटी का बड़ा हिस्सा जलकर खाक हो चुका था।
बताया जा रहा है कि संभवत इसमें शॉर्ट सर्किट या ओवरहीटिंग के कारण आग भड़की। बीकानेर में इन दिनों पारा 43 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। जानकारों का मानना है कि इतनी अधिक तपिश में लिथियम-आयन बैटरी का तापमान 'थर्मल रनवे' की स्थिति में पहुंच जाता है, जिससे आग लगने का खतरा बढ़ जाता है। घटना के बाद काफी देर तक सड़क पर जलने की दुर्गंध और मलबे के कारण आवाजाही प्रभावित रही।
इस घटना ने एक बार फिर इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीकानेर में इससे पहले भी गर्मी के मौसम में बैटरी ब्लास्ट और आग लगने के मामले सामने आ चुके हैं। ऑटो विशेषज्ञों के अनुसार तेज धूप में ईवी को लंबे समय तक खड़ा करना या चलाने के तुरंत बाद फास्ट चार्जिंग पर लगाना खतरनाक हो सकता है। शहर में लगातार बढ़ रही ऐसी घटनाओं से अब इलेक्ट्रिक वाहन मालिकों में डर का माहौल है।
भीषण गर्मी के इस मौसम में इलेक्ट्रिक स्कूटर का उपयोग करते समय सावधानी बरतना बेहद अनिवार्य है। ईवी मालिकों को चाहिए कि वे अपने वाहन को सीधी और तेज धूप में खड़ा करने के बजाय हमेशा किसी छायादार स्थान पर ही पार्क करें, ताकि बैटरी का तापमान सुरक्षित स्तर पर बना रहे। एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि लंबी दूरी तय करने के तुरंत बाद स्कूटी को चार्जिंग पर नहीं लगाना चाहिए। बैटरी को कम से कम आधे घंटे तक ठंडा होने देना चाहिए और उसके बाद ही प्लग-इन करना सुरक्षित रहता है। इसके अलावा वाहन के बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम को हमेशा अपडेट रखें और किसी भी स्थानीय मैकेनिक से बैटरी पैक या वायरिंग के साथ छेड़छाड़ न करवाएं।